KAVITA BAHAR
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*देश पर आधारित रचना

हिंदी कविता-ज्योति यह जले

ज्योति यह जले सूत्र संगठन सँभाल, ज्योति यह जले।कोटि-कोटि दीप-माल ज्योति यह जले। राष्ट्र अंधकार के विनाश के लिए,चिर अतीत के धवल प्रकाश के लिए।बुद्धि के, विवेक के विकास के लिएवृद्धि के समृद्धि के प्रयास के लिए।त्याग की लिए मशाल, ज्योति यह जले। सूत्र संगठन... राष्ट्र की अखण्ड साधना अमर बने,प्राण-प्राण-कंठ की पुकार एक हो।राष्ट्र की नवीन…
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हिंदी कविता-जन्म चाहिए प्यारे हिन्दुस्तान में

जन्म चाहिए प्यारे हिन्दुस्तान में एक हमारी छोटी विनती, भगवन ! रखना ध्यान में,हमें हमेशा पैदा करना, प्यारे हिन्दुस्तान में ॥ सिर पर है हिम मुकुट सलोना, कंठहार गंगा-यमुना,हरियाली की चादर मनहर, फूल - फलों का है गहना।चन्दन भरी हवा लहराती, प्यारे हिन्दुस्तान में ॥ एक हमारीराम-कृष्ण की जन्मभूमि यह, वीर भगत की यह धरती,रानी झाँसी और पद्मिनी की गाथा…
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हिंदी संग्रह कविता-हम अर्चना करेंगे

हम अर्चना करेंगे हे जन्म-भूमि भारत, हे कर्मभूमि भारत,हे वन्दनीय भारत, अभिनन्दनीय भारत,जीवन सुमन चढ़ाकर, आराधना करेंगे,तेरी जनम-जनम भर, हम वन्दना करेंगे। हम अर्चना करेंगे.... महिमा महान् तू है, गौरव निधान तू है,तू प्राण है, हमारी जननी समान तू है,तेरे लिए जिएँगे, तेरे लिए मरेंगे,तेरे लिए जनम भर, हम साधना करेंगे। हम अर्चना करेंगे... जिसका…
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हिंदी संग्रह कविता-हमारे प्यारे हिन्दुस्तान

हमारे प्यारे हिन्दुस्तान हमारे प्यारे हिन्दुस्थान, हमारे भारतवर्ष महान ॥जननी तू जन्मभूमि है, तू जीवन तू प्राण ।तू सर्वस्व शूरवीरों का, जगती का अभिमान ॥ हमारे प्यारे उष्ण रक्त अगणित अरियों का, बार-बार कर पान।चमकी है कितने युद्धों में, तेरी तीक्ष्ण कृपाण ॥ हमारे प्यारे जौहर की ज्वाला में जिनकी, थी अक्षय मुस्कान।धन्य वीर बालाएँ तेरी,…
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हिंदी संग्रह कविता-हम सब भारतवासी हैं

हम सब भारतवासी हैं हम पंजाबी, हम गुजराती, बंगाली, मद्रासी हैं,लेकिन हम इन सबसे पहले केवल भारतवासी हैं।हम सब भारतवासी हैं। हमें प्यार आपस में करना पुरखों ने सिखलाया है,हमें देश-हित, जीना-मरना, पुरखों ने सिखलाया है!हम उनके बतलाये पथ पर, चलने के अभ्यासी हैं!हम सब भारतवासी हैं! हम बच्चे अपने हाथों से, अपना भाग्य बनाते हैं,मेहनत करके बंजर धरती…
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हिंदी संग्रह कविता-हम करें राष्ट्र-आराधन

हम करें राष्ट्र-आराधन हम करें राष्ट्र-आराधन, तन से, मन से, धन से।तन, मन, धन, जीवन से, हम करें राष्ट्र-आराधन॥ अंतर से, मुख से, कृति से, निश्चल हो निर्मल मति से।श्रद्धा से, मस्तक -नत से, हम करें राष्ट्र-अभिवादन ।। अपने हँसते शैशव से, अपने खिलते यौवन से।प्रौढ़तापूर्ण जीवन से, हम करें राष्ट्र का अर्चन ।। अपने अतीत को पढ़कर, अपना इतिहास…
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हिंदी संग्रह कविता- वही देश है मेरा

वही देश है मेरा वही देश है मेरा,वही देश है मेरा। द-ऋचाओं में गूंजा है,जिसका अम्बर नीला।जहाँ राम घनश्याम कर गए,युग-युग अद्भुत लीला।जहाँ बांसुरी बजी ज्ञान की, जागा स्वर्ण सवेरा।वही देश है मेरा.. जहां बुद्ध ने सत्य-अहिंसाका था अलख जगाया।गुरु नानक ने विश्वप्रेम काराग जहाँ सरसाया।मेरे-तेरे भेद-भाव का मन से मिटा अँधेरा।वही देश है मेरा.. जहाँ…
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