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#नेहा चाचरा बहल

यहाँ पर कवयित्री नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’ के कविताओं का संकलन किया गया है . आप कविता बहार शब्दों का श्रृंगार हिंदी कविताओं का संग्रह में लेखक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये हैं .

सूनापन पर गीत आजाओ न तुम बिन सूना सूना लगता हैन जाओ न तुम बिन सूना सूना लगता हैजिसकी डाली पे हम दोनों झूला करते थेवो झूला वो बरगद सूना सूना लगता हैदिन में तुम्हारा साथ रात में ख़्वाब होते थेबिना तुम्हारे सावन सूना सूना लगता हैजिन आँखों में सदा तुम्हारा अक्स समाया थाउन आँखों का काजल सूना सूना लगता…
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