सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता

सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता तो मैं क्या करूँ ? आज आसमाँ भी रोया मेरे हाल परऔर अश्कों से दामन भिगोता रहा,वो तो पहलू से दिल मेरा लेकर गयेऔर मुड़कर न देखा तो मैं क्या करूँ ? उनकी यादें छमाछम बरसती रहींमन के आंगन को मेरे भिगोती रहींखून बनकर गिरे अश्क रुख़सार पर,कोई पोंछे न …

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