ताटंक छंद

भाषाओं के अतिक्रमण

भाषाओं के अतिक्रमण सर्वनाम से पूछ रहे हैं, संज्ञा नाम कहाँ जाएँ…भाषाओं के अतिक्रमण में, हिंदी धाम कहाँ पाएँ… स्वर व्यंजन के मेल सुहाने, संयुक्ताक्षर देते हैं।वर्ण-वर्ण की संधि देखिये, नव हस्ताक्षर देते हैं।हिंदी की बिंदी को देखो, अनुस्वार है छोटा सा।अर्ध चंद्र अनुनासिक मानों, काजर आँजे मोटा सा। साधारण से मिश्र वाक्य अब, पूर्ण …

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भारतीय वायु सेना के सम्मान में कविता

भारतीय वायु सेना के सम्मान में कविता भारतीय वायु सेना के जवानों के,सम्मान में सादर समर्पित छंद,. (३०मात्रिक (ताटंक) मुक्तक) मेरे उड़ते…… ….. बाजों काचिड़ीमार मत काँव काँव कर,काले काग रिवाजों के।वरना हत्थे चढ़ जाएगा,मेरे उड़ते बाज़ों के।बुज़दिल दहशतगर्दो सुनलो,देख थपेड़ा ऐसा भी।और धमाके क्या झेलोगे,मेरे यान मिराजों के। तू जलता पागल उन्मादी,देख भारती साजों …

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