विवाह-एक पवित्र बंधन

विवाह-एक पवित्र बंधन

विवाह एक संस्कृति व संस्कार है।
विवाह बंधनों का मधुर व्यवहार है।
दो पवित्र आत्माओं का होता मिलन।
लुटाएँ एक दूजे पर असीम प्यार है।1।
सात जन्मों का है ये प्यारा बंधन।
वंश बेला बढ़ाने का नाम है जीवन।
केवल बंधन नहीं विवाह स्त्री पुरुष का।
दो पवित्र आत्माओं का है मधुर मिलन।2।
सुख दुख बाँटने का रास्ता है विवाह।
जीवन भर साथ निभाने का वास्ता है विवाह।
प्यार मोहब्बत से दो दिलों का होता मेल।
एक मंजिल तक पहुँचने का रास्ता है विवाह।3।
विवाह के लिए दिल में सपना संजोना पड़ता है।
गीले शिकवे को मिटा मधुर अहसास बढ़ाना पड़ता है।
विवाह कोई बंधन नहीं है मधुर,सात जन्मों का।
जीवन भर एक दूजे पर जान लुटाना पड़ता है।4।


*सुन्दर लाल डडसेना”मधुर”*
साहित्य साधना सभा छत्तीसगढ़
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