पितृ पक्ष का सच्चा श्राद्ध-धनंजय सिते(राही)

पितृ पक्ष का सच्चा श्राद्ध

आजका बच्चा कलका यूवा
और परसो बुढ़ा होना है!
ये प्रकृती का नियम है सबको
एक दिन इससे गुजरना है!!
                  २
आजकी बेटी कल पत्नी माता
परसो वह भी बनेगी सास!
बेटा आजका कल पती,पिता है
दादा,नाना परसो का खास!!
                   ३
यही परिवार का चक्र है मित्रो
यह सबके साथ ही होना है!
कद्र करो सब बुजूर्गो की तुम
हम सबको ही बुढ़ा होना है!!
                    ४
जिवित है जबतक मात पिता
या हम सबके वो सास ससुर!
जितनी भी होती सेवा कर लो
ना जीवन लगे उनको मज़बुर!!
                   ५
खान पान का ध्यान रखो तुम
दुध दवाई समय पर दो!
जिंदे है तब तक जीवन मे उनके
सारी खूशिया तुम भर दो!!
                    ६
बोझ जिन्दगी उन्हे ना लगे
व्यवहार ही ऎसा करना तुम!
मान रख सम्मान भी करना
मन माफिक सारा करना तुम!!
                   ७
अंत समय जब उनका आए तो
बहू,बेटा कहने हो वो बाध्य!
मरने पे दिखावा करने से अच्छा
यही पितृ पक्ष का सच्चा श्राद्ध!!
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कवि-धनंजय सिते(राही)
जिला-छिन्दवाड़ा(म.प्र.)
सम्पर्क-9893415829
   
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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