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बेदर्द जमाने तू क्या जाने -मनीभाई नवरत्न

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बेदर्द जमाने तू क्या जाने

बेदर्द जमाने तू क्या जाने ?
तू क्या जाने ? तू न जाने मन में प्रेम जगाने ।।

होती कैसी इश्क का उफान ?
होती कैसी दिल का फरमान ?
तू न जाने मन में प्रेम जगाने ।।
बेदर्द जमाने ….

ऐ जब तू सोती ,दीवाने जगते हैं।
आंखों में बस प्रेम के ख्वाब बसते हैं।
जलते हैं खुद से चाहत के परवाने ।
बेदर्द जमाने ….

चलता है तू राहों में अपनी खुशी के लिए ।
अपनी खुशी तो बस अपने दिलबर के लिए ।
आया फिर भी तू देखो प्यार जताने ।
बेदर्द जमाने ….

तू रहता है, ऊंची नीची मंजिल में।
हम रहते हैं एक दूजे के दिल में ।
बूनते हैं सारी रात मोहब्बत के अफसाने ।
बेदर्द जमाने….

manibhainavratna
manibhai navratna

🖋मनीभाई नवरत्न

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