
भारत रत्न भीमराव अंबेडकर जी
सुखों की धाम जिसने दी।
गिरे पिछड़े जो कुचले थे,
उन्हें भी मान जिसने दी।
भारती माँ की रत्नों में,
अमर है भीम जी बाबा।
परम अम्बेडकर ही है,
हमें संविधान जिसने दी।
रहे चिंतक परम जग में,
मनुजता मर्म पंथों के।
मिला है पुण्य हम सबको,
उन्हीं के श्रेष्ठ कर्मो के।
बिना अम्बेडकर के आज,
हम ऐसे नहीं होते।
अमर है भीम जी बाबा,
प्रणेता जो सुधर्मो के।
विजय पथ पर ही चलना है,
नहीं अब हार करना है।
रहे सुरभित सदा बगिया,
सुखी संसार करना है।
हमें अम्बेडकर के कर्म,
सारे याद रखने को।
लगा जय भीम की नारा,
प्रखर गुंजार करना है।
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डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

