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महबूब से मिलने की तमन्ना

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महबूब से मिलने की तमन्ना

महबूब से मिलने की तमन्ना।
हर पल जिसके लिए जीना।
चुपके से उसके कानों में ।
दिल की हर बातें सुनाना।
आज कहेंगे उनसे , दिल की छुपी बात।
राह देखेंगे फिर चाहे, दे ना अपनी हाथ ।
अब एक भी बात उसने ना छिपाना ।।
कहते ही दिल की बात आंखो में उनके आंसू आए।
मुझको डर लगा शायद मेरी बातें दिल दुखाए।।
ना कर सकूं मैं जिनसे आंख मिलाना।।
मैं तो वही करता हूं जो दिल को अच्छी लगे।
है बातें ना छुपाना किसी से यह मुझे सच्ची लगे ।
प्यार में हो गया पागल दीवाना ।।
सांसो से पता ना चले, मुख से ना वह बोल सकें।
शर्म से नजरें झुके मंजूरी से सिर डुले।
सनम पूरे हो गए हैं मेरे सपना।।
हां करके तू चली गई शाम भी ढल गई ।
चैन मेरा छूटा दिल मेरा टूटा जब तू खो गई।
धड़ के अब तो गम से मेरा सीना।।
खबर तेरी जब आई हो चुकी तू मुझसे जुदाई ।
कर दी क्यों जानम हां करके भी बेवफाई ।।
अब ना किसी को दिल में बसाना ।
महबूब से मिलने की तमन्ना

-मनीभाई नवरत्न

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