गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी

गरीबी का दर्द

क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरी
सुख गया है आंखों के पानी
रिमझिम बारिश की फुहार में
समेट रखा है आंचल में
गरीब तेरी कहानी को
उपहास बनायेगी ये दुनिया
तू कल भी फुटपाथ पर था
आज भी तेरी यही कहानी है
गरीब था तू गरीब रहेगा
वंचित तू अपने तकदीर से रहेगा
सुन गरीब लगा लें जोर
अपना अस्तित्व बचा ले अब
अब ना कोई कर्ण लेगा जन्म
अब ना कृष्ण का मिलेगा वरदान
तेरी करनी तु ही जाने
मैं तो मतवाला आगे बढ़ा
तरस आयेगी भी तो
कैद कैमरे में कर लुंगा
तेरे दुख दर्द से 
मैं पर्दा यूं ही कर लुंगा
आगे आगे बहुत आगे
मैं बढ़ते बढ़ते बढ़ जाऊंगा
तेरा कर्म तु जाने
गरीबी में जियो या मर जाओ
कड़ी धुप बारिश गर्मी ठण्डी
सब परीक्षा लेंगे तेरी
कभी फटेहाल चादर ओढ़े
कभी रफू किये कपड़े पहन लेना
उपहास उड़ाती रहेंगी दुनिया
गरीबी में तुम जीना सीख लेना

      महेश गुप्ता जौनपुरी
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

इस रचना को शेयर करें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top