विरह और दर्द

दर्द के व्यापारी को देख लो/ मनीभाई नवरत्न

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द के व्यापारी को देख लो जिसे देखकरतुम अपने दर्द से लड़ते हो,जिसे पाकरतुम थोड़ी देर जी लेने की हिम्मत जुटाते हो—उसी दर्द का सौदागरतुम्हारे सामने मुस्कुरा कर खड़ा है। वह पहलेतुम्हारे भीतर एक कमी पैदा करता है,फिर उसी कमी का इलाज बनकर आता है।वह घाव देता हैऔर मरहम की कीमत तय करता है।तुम्हारी बेचैनीउसकी […]

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मर्द का दर्द / डॉ विजय कुमार कन्नौजे

विरह और दर्द

मर्द का दर्द / डॉ विजय कुमार कन्नौजे नारी बिना ना मर्द हैंमर्द का एक दर्द है।एक अनजाने कन्या लाकरपालने पोसने का कर्ज है। सिर झुका विनती नार कोहाथ जोड़ अर्ज है।जन्म दाता माता पिता का जिंदगी भरे कर्ज है। मर्द का एक दर्द है।। पाप कर्म किया है मर्दबच्चन पालना फर्ज है माता पिता

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दर्द पर दोहे- मदन सिंह शेखावत ढोढसर

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द पर दोहे दर्द किसी को दे नही ,हे  जग  के करतार।दर्द देखा जाय नही ,किससे करू पुकार ।।1 दीन दुखी सब खुश हो, पीड़ा किसे न आय।सब जनता खुश हाल हो, विपदा नही सताय।।2 होती  मन  मे  वेदना,दर्द  दुखी  कर  जाय ।विपदा आफत टाल कर,सब की करे सहाय ।।3 दर्द  किसी  को  दे नही,लौटे 

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बेटी का दर्द पर कविता

विरह और दर्द

बेटी का दर्द पर कविता अब तो लगने लगा है मुझको,कोख में ही माँ मुझको कुचलो।बाहर का संसार है सुंदर,ऐसा लगता है कोख के अंदर।पर जब पढ़ती हो तुम खबरें,हत्या, बलात्कार, जेल और झगड़े।नन्हा सा ये तन मेरा,भर उठता है पीड़ा से।विदीर्ण हो उठता कलेजा मेरा,अंतर में होती है पीड़ा। सुनकर माँ मुझको तकलीफ,जब होती

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दर्द के रूप कविता

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द के रूप कविता स्वयं के दर्द से रोना,अधिकतर शोक होता है।परायी-पीर परआँसू,बहे तो श्लोक होता है। निकलती आदि कवि की आह से प्रत्यक्ष भासित है,हृदय करुणार्द्र हो,तब अश्रु पर आलोक होता है। धरा की,धेनुओं की,साधुओं की प्रीति-पीड़ा से,हैं धरते देह ईश्वर,पाप-मुञ्चित लोक होता है।   —– R.R.Sahu

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दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द कागज़ पर बिखरता चला गया दर्द कागज़ पर बिखरता चला गयारिश्तों की तपिश से झुलसता चला गयाअपनों और बेगानों में उलझता चला गयादर्द कागज़ पर बिखरता चला गया कुछ अपने भी ऐसे थे जो बेगाने हो गए थेसामने फूल और पीछे खंजर लिए खड़े थेमै उनमें खुद को ढूंढता चला गयादर्द कागज़ पर बिखरता

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किसे कहूं दर्द मेरा

विरह और दर्द, हिंदी कविता

किसे कहूं दर्द मेरा किसे कहूं दर्द मेराओ मेरे साजनलगे सब कुछ सुना सुना सातुम बिन छाई मायूसीकाटने को दौड़ते हैं ये लम्हेहर पल, पल पल भीवीरान खण्डहर की तरहछाया काली जुल्फों सा अंधेरा बिन तेरे ए हमसफ़र ।सताता हैं अकेलापनहर वक़्त क्षण क्षण भीक्यो जुदा हुए तुम तोड़कर दिल मेराक्यो बना विरह वियोगटूटा वो अनुराग प्याराक्यो

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दर्द के जज़्बात

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द के जज़्बात अवाम दिखाती दर्द के जज़्बात, पर हुकूमत क्या समझे ? कही अनकही बात, लोगों का पैसा तो नहीं खैरात! आखिर इन गै़रकानूनी से कब मिलेगी निजात? ग़ुरूर करवा देगीएक दिन इंकलाब से मुलाक़ात, जब करे हुकूमत ही जारी करेगीमनचाहे मनचले फरमान। आम आदमी काना हो नुकसान। ग़लत फैसलों से ना करे परेशान,हुक्मरान न लें सब्र का इम्तिहान ।। -राजशेखरकविता बहार से जुड़ने

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गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी

विरह और दर्द, हिंदी कविता

गरीबी का दर्द क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरीसुख गया है आंखों के पानीरिमझिम बारिश की फुहार मेंसमेट रखा है आंचल मेंगरीब तेरी कहानी कोउपहास बनायेगी ये दुनियातू कल भी फुटपाथ पर थाआज भी तेरी यही कहानी हैगरीब था तू गरीब रहेगावंचित तू अपने तकदीर से रहेगासुन गरीब लगा लें जोरअपना अस्तित्व बचा ले अबअब ना

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दुख दर्द सभी के हर लें वो माता शेरावाली

विरह और दर्द

दुख दर्द सभी के हर लें वो माता शेरावाली दुख दर्द सभी के हर लें वो माता शेरावाली,झोली सबकी तु भर दे वो माता मेहरावाली,नौ दिन का ये त्योहार लगे बडा ही प्यारा,तुमसे सबकी मैया नाता बडा ही न्यारा,प्रेम सुधा बरसा दे तु लाल चुनरियाँ वाली,दुख दर्द सभी—————–बडी निराली मैइया दुख सबके हर लेती है,पार

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