दर्द से नमस्ते कहो
विरह और दर्द, हिंदी कवितादर्द से नमस्ते कहो दर्द आएगा—यह टाला नहीं जा सकता।पर भ्रम?वे वैकल्पिक हैं। कुछ दर्दसंयोग से आते हैं—बिना अनुमति।उन्हेंउतनी ही जगह दोजितनी ज़रूरी हो। कुछ दर्दतुम चुनते हो—सही बदलाव की कीमत।उसेखुले दिल सेस्वीकार करो। और कुछ दर्दमूर्खता से पैदा होते हैं—गलत निर्णय,बिना देखे उठाए कदम।यह दर्द क्यों ढोना? जीवनलगातार बहता है।देह और मनठहराव चाहते हैं।यहीं
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