Hurt Is When Fantasy Breaks
(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद)
चोट
अचानक नहीं लगती,
वह उसी जगह लगती है
जहाँ
तुम्हारा लगाव
सबसे गहरा होता है।
अगर दुख है,
तो उसे
भाग्य या दूसरे पर मत डालो—
अपने
आसक्ति को देखो।
दर्द
किसी घटना का नाम नहीं,
वह उस कहानी का टूटना है
जिसे तुम
चुपचाप
पाले हुए थे।
एक तस्वीर थी,
एक उम्मीद थी,
एक विश्वास था—
और यथार्थ ने
उसे मानने से
इनकार कर दिया।
क्या बिना
मालिकाना भाव के
दर्द होता है?
क्या बिना
इच्छा के
घाव लगता है?
जहाँ
तुम सबसे ज़्यादा
चाहते हो,
वहीं
तुम सबसे ज़्यादा
टूटते हो।
अजनबी
कम ही दुख देते हैं।
दर्द तो
वहीं से आता है
जहाँ तुम
किसी को
परिभाषित करना चाहते हो,
काबू में रखना चाहते हो,
अपना बनाना चाहते हो।
जब सामने वाला
तुम्हारी कल्पना से
इनकार करता है,
तो पीड़ा जन्म लेती है।
दर्द
असल में
यथार्थ का
भ्रम पर
पड़ा हुआ
तमाचा है।
तुमने चाहा,
तुमने माना,
तुमने उम्मीद की—
और यथार्थ ने
मना कर दिया।
बस,
यहीं से
पीड़ा शुरू हुई।
सच
कभी आहत नहीं होता।
टूटता है
केवल अहंकार।
खून
सिर्फ सपना
बहाता है।
बिना भ्रम के जीना
दर्द से भागना नहीं,
बल्कि
उससे मुक्त होना है—
क्योंकि
झूठा “मैं”
तब खोने के लिए
कुछ बचा ही नहीं रखता।
दर्द
तुम्हारा शत्रु नहीं,
वह
आसक्ति का
अलार्म है।
उसे सुनो।
और
जाग जाओ।





