आशा की जीत | विश्व कैंसर दिवस पर हिंदी कविता | Hope Against Cancer

आशा की जीत
(विश्व कैंसर दिवस पर कविता)
यह लड़ाई देह से नहीं,
हौसले से लड़ी जाती है,
जब उम्मीद साथ हो
तो पीड़ा भी
हार मान जाती है।
कक्ष में फैली चुप्पी के बीच
एक मुस्कान जन्म लेती है,
दवाइयों से नहीं—
विश्वास से
ज़िंदगी बढ़ती है।
बाल झड़ते हैं,
पर सपने नहीं,
आँसू आते हैं,
पर साहस थकता नहीं।
हर रिपोर्ट के पीछे
एक प्रार्थना होती है,
और हर प्रार्थना में
जीत की संभावना होती है।
विश्व कैंसर दिवस कहता है—
डरो मत,
लड़ो,
क्योंकि अंत में
आशा ही
जीतती है।

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