संस्कारों की करते खेती

संस्कारों की करते खेती बीज रोप दे बंजर में कुछ,यूँ कोई होंश नहीं खोता।जन्म जात बातें जन सीखे,वस्त्र कुल्हाड़ी से कब धोता। संस्कृति अपनी गौरवशाली,संस्कारों की करते खेती।क्यों हम उनकी नकल उतारें,जिनकी संस्कृति अभी पिछेती।जब जब अपने फसल पकी थी,पश्चिम रहा खेत ही बोता।बीज रोप दे बंजर में कुछ,यूँ कोई होंश नही खोता। देश हमारा … Read more

एक खनकता गीत मेरा

एक खनकता गीत मेरा पास बैठो और सुनो बसएक खनकता गीत मेरा।। जीवन समर बहुत है मुश्किल,बाधाओं की हाट लगी है।दुनिया रंग बिरंगी लेकिन,होती देखी नहीं सगी है।इसीलिए गाता अफसाने,रूठ गया क्यों मीत मेरा।एक खनकता गीत मेरा।। मैं तो सच्चे मन का सेवक,खूब समझता पीर पराई।लेकिन दुनिया, दुनिया वाले,सबने मेरी पीर बढ़ाई।मैं भी भूलूँ इस … Read more

मुझको गीत सिखा देना

मुझको गीत सिखा देना कोयल जैसी बोली वाले,मुझको गीत सिखा देना। शब्द शब्द को कैसे ढूँढू,कैसे भाव सँजोने हैं।कैसे बोल अंतरा रखना,मुखड़े सभी सलोने हैं।शब्द मात्रिका भाव तान लय,आशय मीत सिखा देना।कोयल जैसी बोली वाले,मुझको गीत सिखा देना। मन के भाव मलीन रहे तब,किसे छंद में रस आए।राग बिगड़ते देश धर्म पथ,कहाँ गीत में लय … Read more

तब मैं भी चाहूँ प्यार करूँ

तब मैं भी चाहूँ प्यार करूँ मन में शुभ भाव उमड़ते हों,तब मैं भी चाहूँ,प्यार करूँ। जब रिमझिम वर्षा आती हों,ज्यों गीता ज्ञान सुनाती हो।खिड़की से तान मिलाती हो,मुझको मानो उकसाती हो।श्वेद संग वर्षा में गाऊं,मै,भी जब कुछ श्रम साध्य करूं।मात का उज्जवल भाल सजे,तब मैं भी चाहूँ प्यार करूँ।। भाती है दिल आलिंगन सी,स्वर … Read more

हरेली त्यौहार पर हिंदी कवितायें

हरेली त्यौहार की महत्व का वर्णन कविता के माध्यम से किया गया है।