भारत छोड़ो आंदोलन के वीर

भारत छोडो आन्दोलन

भारत की आजादी में भारत छोड़ो आंदोलन का अहम योगदान रहा है, इस आंदोलन का गुणगान कविता के माध्यम से किया गया है।

सुमन! अल्प मधुर तेरा जीवन

सुमन! अल्प मधुर तेरा जीवन सुमन! अल्प मधुर तेरा जीवन।याद रहेगा      इस जग      को,कण-कण घुलना सौरभ बन-बन। कितने अलियों ने अभिसिक्त किया,मधुर समीरण  सहलाया  दुलराया।देकर मिलता है           जग    में,मरकर   अमरता का ये अभिनन्दन। मुझको ये जग  विस्मृत  कर  देगा,मिट जाएगा                  मेरा नाम।नहीं दे पाई      में       इस जग को,सुमन- सुतन का      तुझसा  दान। देना चाहूं     इस … Read more

बचपन की यादें -साधना मिश्रा

बचपन की यादें -साधना मिश्रा वो वृक्षों के झूले वो अल्हड़ अठखेलियां।वो तालाबों का पानी वो बचपन की नादानियां। वो सखाओं संग मस्ती वो हसीं वादियां।वो कंचा कंकड़ खेलना वो लड़ना झगड़ना। वो छोटा सा आंगन वो बारिश का पानी।वो कागज की नाव वो दादी की कहानी। याद आती मुझे वो मीठी शरारतें।वो खुशदिल तबस्सुम … Read more

पिरामिड रचना (शबरी ) -साधना मिश्रा

पिरामिड रचना (शबरी ) हैं,बेर,नहीं ये;स्नेह नीर,अश्रु- बिंदु हैं;समर्पित तुम्हें,हे श्री रघुनन्दन! दी,ज्ञान,गुरु ने,परिचय,पाया पावन;तृषित पिपासा,पाऊं तेरा दर्शन!यूं,झुकी,कमर,विरहिणी;अंतर तम,आतुर मिलन,हे श्यामल बदन! ये,देखो,थकित,विगलित,अविचलित;चिर प्रतिक्षित,अपलक नयन! की,मैंने,करुण,प्रतीक्षा है;अब तो आओ,निष्ठुर बनो न,हे, स्नेह सदन! दो,रज,चरण,सुचि कणकृपा सुमन;मेरे मस्तक हो,हे, पतित पावन! साधना मिश्रा, रायगढ़- छत्तीसगढ़

भगत सिंह की याद में

भगत सिंह की याद में टपक टपक के आंसुओं का दरिया बन गयासितम गम का, समा भी गमगीन हो गया। खामोशी बिखरी ,मुर्दों पर ढकी कफ़न लिएपर कदम ना थके ना हिम्मत हारी वतन के लिए। बढ़ते चले ,इंकलाब कहते चले ,अंग्रेजो की बर्बादी लिएभारत भूमि में जन्मे, भगत सिंह दुश्मनों से हमें बचाने के … Read more