शबरी के बेर(चौपाई छंद)
शबरी के बेर(चौपाई छंद) त्रेता युग की कहूँ कहानी।बात पुरानी नहीं अजानी।।शबरी थी इक भील कुमारी।शुद्ध हृदय मति शील अचारी।।१ बड़ी भई तब पितु की सोचा।ब्याह बरात रीति अति पोचा।।मारहिं जीव जन्तु बलि देंही।सबरी जिन प्रति प्रीत सनेही।।२ गई भाग वह कोमल अंगी।वन ऋषि तपे जहाँ मातंगी।।ऋषि मातंगी ज्ञानी सागर।शबरी रहि ऋषि आयषु पाकर।।३ मिले … Read more