तुम कितना अँधेरा पीछे छोड़ आए?
हिंदी कवितातुम कितना अँधेरा पीछे छोड़ आए? अपने आप सेसिर्फ एक प्रश्न पूछो— क्यामेरे जीने का तरीकामेरे भीतर का अँधेराकम कर रहा है? बस यही दर्पण है।इसके अलावासब शोर है। यह मायने नहीं रखताकि पेट भरा है या नहीं,कपड़े कितने सिले-सजाए हैं,धन कितना जमा है,नाम कितना चमकता है। ये सब बाहर की दुनिया केआँकड़े हैं—और भीतर […]
तुम कितना अँधेरा पीछे छोड़ आए? Read More »


