कविता बहार

तुम कितना अँधेरा पीछे छोड़ आए?

हिंदी कविता

तुम कितना अँधेरा पीछे छोड़ आए? अपने आप सेसिर्फ एक प्रश्न पूछो— क्यामेरे जीने का तरीकामेरे भीतर का अँधेराकम कर रहा है? बस यही दर्पण है।इसके अलावासब शोर है। यह मायने नहीं रखताकि पेट भरा है या नहीं,कपड़े कितने सिले-सजाए हैं,धन कितना जमा है,नाम कितना चमकता है। ये सब बाहर की दुनिया केआँकड़े हैं—और भीतर […]

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अतीत तभी रहता है, जब तुम उसे भोजन देते हो

हिंदी कविता

अतीत तभी रहता है, जब तुम उसे भोजन देते हो अतीतलड़ने से नहीं छूटता।उसे भूलने की कोशिश करना—उसे पकड़े रहने कासबसे पक्का तरीका है। तुम कहते हो—मैं इसे भूल जाना चाहता हूँ।और हर दिनयही कहते हुएतुम उसेयाद करते रहते हो। भूलने की इच्छा भीस्मरण काएक रूप है। मनभूलना जानता है।आज सुबह सेअब तकजो कुछ हुआ—क्या

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घाव भी मुस्कुरा सकते हैं

हिंदी कविता

घाव भी मुस्कुरा सकते हैं दर्द आएगा—यह कोई अपवाद नहीं,यह जीवन का स्वभाव है। तुम उसे रोकना चाहते हो,यही तुम्हारी भूल है।दर्द से नहीं,दर्द के विरोध सेपीड़ा जन्म लेती है। जब तुम कहते हो—“ऐसा नहीं होना चाहिए था”तभी अहंकारयथार्थ से लड़ने लगता है।और वही संघर्षदर्द को यातना बना देता है। दर्द को आने दो।उसे भीतर

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सफल हो रहे हो — या कब्ज़े में जा रहे हो?

हिंदी कविता

सफल हो रहे हो — या कब्ज़े में जा रहे हो? तुम सोचते होकि जीत रहे हो—पर असल मेंतुम्हें जीता जा रहा है। जिसे तुमदुनियावी सफलता कहते हो,वह अक्सर दुनिया कीतुम पर निर्दय जीत होती है। यह तुम्हाराविश्व पर विजय नहीं—यह विश्व कातुम्हें अपने कब्ज़े में ले लेना है। दुनियातुम्हें सिर्फ़ लुभाती नहीं।वह तुम्हें पालतू

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आत्मा-अवलोकन

हिंदी कविता

हम डरते रहे आत्मा-अवलोकन से,इस भ्रम में किजैसे ही सच मान लिया,कोई हाथ में पोछा थमा देगाऔर कहेगा —“अब साफ करो,यह तुम्हारी ही गंदगी है।” हम थक चुके थेदोष ढोते-ढोते,इसलिए सच से भीकाम की तरह डरते थे।फिर एक वाक्य आया—कठोर नहीं,पर निर्विवाद:“जैसे ही बंधन स्वीकारे जाते हैं,आप वही नहीं रहते।”कोई समाधान नहीं दिया गया,कोई विधि

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बोध और अवबोध

हिंदी कविता

बोध और अवबोध बोध और अवबोधजान लेना हीदेख लेना नहीं होता।सूचनायेंआँख नहीं खोलती,केवल स्मृति भरती है।यही भ्रमजीवन भर चलता रहता है। तथ्य बताए गए,पर भीतर कुछ नहीं हिला।कहा गया—यह ठीक है,यह गलत है।दिमाग नेसहमति दे दी,जीवन वैसा ही रहाजस का तस। आग का वर्णनहाथ नहीं जलाता।जब तक तापस्वयं को न छुए,सावधानीकेवल एक विचार तक रहती

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सुविधा के विरुद्ध सत्य

हिंदी कविता

सुविधा के विरुद्ध सत्य मैंने देखा—लोग सच नहीं ढूँढते,वे अपनी सुविधा ढूँढते हैं। भीड़ के कंधों पर चढ़करहर कोई ऊँचा दिखना चाहता है,पर अपने भीतर उतरने सेसब डरते हैं। हम शोर को संवाद कहते हैं,सूचनाओं को समझ,और आदतों को जीवन। जो बिना प्रश्न चले,वही स्वीकार्य हो जाता है;जो ठहरकर देखे—वह असुविधाजनक ठहरता है। स्वतंत्रताकोई उपहार

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छोटे क्यों बने रहना?

हिंदी कविता

छोटे क्यों बने रहना? छोटा जन्म लेनाकोई अपराध नहीं है। अज्ञान, असुरक्षा, प्रतिक्रिया—यहीं से हर जीवन शुरू होता है। पर छोटा बने रहनाएक चुनाव है। महानकोई जन्म से महान नहीं होता। वह बस एक दिनइतना कह देता है—अब और नहीं। अब इस छोटेपन सेसमझौता नहीं। वह सुविधा के बजायज़िम्मेदारी चुनता है।भ्रम के बजायस्पष्टता।भटकाव के बजायगहराई।

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अरावली पर्वत

अरावली, जंगल, बाजार और मैं

हिंदी कविता

अरावली, जंगल, बाजार और मैं अरावलीसिर्फ पहाड़ नहीं है,यह समय की रीढ़ है,जो थामे खड़ी हैरेगिस्तान कीबढ़ती हुई लालसा को। जब अरावली कटती हैतो पत्थर नहीं गिरते,भविष्य दरकता है,पीढ़ियों की प्यासज़मीन के भीतरसूख जाती है। जंगलपेड़ों की गिनती नहीं,धरती के फेफड़े हैं,जहाँ हवासंस्कार लेकर निकलती है,और जीवनसंतुलन सीखता है। एक पेड़ गिरता हैतो एक छाया

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अस्तित्व

अस्तित्व (अतुकांत कविता)

हिंदी कविता

अस्तित्व (अतुकांत कविता) मैं नाम लेकर पैदा नहीं हुआ,नाम मुझे दिया गया।मैं रास्ता लेकर नहीं आया,चलते-चलते मैंने पगडंडी बनाई। किसी ईश्वर ने मेरी पटकथा नहीं लिखी,किसी भाग्य ने मेरी सीमा तय नहीं की।मैं हर क्षणअपने ही हाथों सेअपने होने की परिभाषा लिखता रहा। लोग कहते हैं—“तू ऐसा ही है”पर मैं जानता हूँ,मैं वैसा नहीं हूँ—मैं

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मौन का साम्राज्य – मौन और शांति पर गहन कविता

हिंदी कविता

मौन का साम्राज्य” एक गहन दार्शनिक कविता है जिसमें बताया गया है कि शब्द बंधन हैं और मौन ही सच्ची मुक्ति है। पढ़ें यह प्रेरणादायक रचना जो शांति और आत्मज्ञान की ओर ले जाती है। आज का युग शोर और शब्दों से भरा हुआ है। हम दिन-रात बोलते हैं, बहस करते हैं और अपनी बात

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चाह गई चिंता मिटी: एक प्रेरणादायक कविता

प्रेरणा और सकारात्मकता

चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।जिनको कछु न चाहिए, वे साहन के साह॥ रहीम कहते हैं कि किसी चीज़ को पाने की लालसा जिसे नहीं है, उसे किसी प्रकार की चिंता नहीं हो सकती। जिसका मन इन तमाम चिंताओं से ऊपर उठ गया, किसी इच्छा के प्रति बेपरवाह हो गए, वही राजाओं के राजा हैं।

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