बछ बारस पर कविता – दोहा छंद

doha sangrah

बछ बारस पर कविता – दोहा छंद

बछ बारस सम्मानिए, गौ बछड़े की मात।
मिटे पाप संताप तन, दैव प्रमाणित बात।।

पावस सावन में मनें, बछ बारस का पर्व।
गौ सेवा कर नर मिले, मेवा मंगल गर्व।।

भिगो मोठ को लीजिए, उत्तम यह आहार।
गौ को मीठे में खिला, बछ बारस व्यवहार।।

गौ माताएँ हिन्द हित, बछ सौभाग्य किसान।
बछ बारस पर दीजिए, इन्हे सत्य सम्मान।।

गौधन खेत किसान है, भारत के अभिमान।
बछ बारस पर ‘बोहरा’, कर इनके यशगान।।

बाबू लाल शर्मा, बौहरा, विज्ञ
निवासी – सिकन्दरा, दौसा

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