बेपरवाह लोग पर कविता

बेपरवाह लोग पर कविता

ये उन लोगों की बातें हैं
जो लॉकडाउन,कर्फ़्यू, धारा-144
जैसे बंदिशों से बिलकुल बेपरवाह हैं

जो हजारों की तादात में
कभी आनन्द विहार बस स्टेंड दिल्लीमें
यकायक जुट जाते हैं
तो कभी बांद्रा रेल्वे स्टेशन मुम्बई में
अचानक इकट्ठे हो जाते हैं

ये कोई एकजुट संगठित ताकत नहीं है
किसी सोची-समझी साज़िश का हिस्सा भी नहीं है
इनके कोई एजेंडे या
कोई ख़ास मक़सद और मांग भी नहीं है

ये इतने मासूम लोग हैं
जिनके जीवन संचालन में
‘रणनीति’ और ‘योजना’ जैसे शब्द भी नहीं है

ये वो लोग हैं
जिनके जीवन में
‘संकल्प’ और ‘संयम’
बेईमानी भरे शब्द लगते हैं

ये वो लोग हैं
जिनका जीवन
केवल भूख से
पीछा छुड़ाने में खप जाता है
पर ‘भूख’ कभी नहीं जाता है

ये वो लोग है
जो सदियों से
‘भूख’ की बीमारी से
लड़ते आ रहे हैं

ये वो लोग हैं
जिनके लिए
‘कोरोना’ से ज़्यादा ज़रूरी है
भूख की लड़ाई।

नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
9755852479

बहार
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