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आरती/वंदना

बोलो रे बोलो बोलो राधे गोपाल बोलो- आरती – मौलिक रचना…

इस रचना को श्री कृष्ण की भक्ति के रूप में भजन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है | बोलो रे बोलो बोलो राधे गोपाल बोलो- आरती - मौलिक रचना - अनिल कुमार…

मुझे तेरे करम का एहसास हो – कविता – मौलिक रचना…

इस रचना में कवि उस खुदा के करम और रहम का एहसास कर रहा है | मुझे तेरे करम का एहसास हो - कविता - मौलिक रचना - अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"

चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं – कविता – मौलिक रचना…

इस रचना के माध्यम से कवि स्वयं को प्रभु भक्ति में लीन करना चाहता है और स्वयं के मोक्ष की कामना करता है | चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं - कविता -…

तेरे चरणों में पुष्प बनकर मैं बिखर जाऊं तो अच्छा हो- कविता…

इस कविता के माध्यम से कवि उस खुदा/परमात्मा की इबादत में खुद को भूल जाना चाहता है । तेरे चरणों में पुष्प बनकर मैं बिखर जाऊं तो अच्छा हो- कविता - अनिल…

फिर से नवजीवन का विहान

फिर से नवजीवन का विहान जग-जीवन में जो चिर-महान्,सौन्दर्य-पूर्ण औ' सत्य-प्राण मैं उसका प्रेमी बनूँ, नाथ,जो हो मानव के हित समान। जिससे जीवन…