नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट

0 190

इस कविता में भुवन बिष्ट ने आशा, प्रेम, और भाईचारे का संदेश दिया है। हर व्यक्ति के मन में नई उम्मीदों और सकारात्मकता के दीप जलाने का आह्वान किया है, जिससे समाज में शांति, प्रेम, और सद्भावना का वातावरण बने।

नव दीप जले हर मन में/ भुवन बिष्ट

नव दीप जले हर मन में,
          अब तो भोर हुई हुआ उजियारा।
लगे विहग धरा में चहकने,
          रवि किरणों से जग सजे सारा।।
बहे पावन सरिता का जल,
          हिमशिखरों पर लालिमा छायी।
बनकर ओस की बूँदें छोटी, 
           जल मोती यह मन को भायी ।।
कुमुदनियाँ अब खिलने लगी,
             धरा में महक रहे पुष्प सारे।
भानू की अब चमक देखकर,
             छिप गये आसमां में अब तारे।।
सजाया जग निर्माता ने,
             नभ जल थल सुंदर प्यारा ।
नव दीप जले हर मन में,
          अब तो भोर हुई हुआ उजियारा।
                       ……भुवन बिष्ट
                  रानीखेत(उत्तराखंड)

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.