जय गणपति जय पार्वती सुत- गणेश स्तुति

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है।

भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक लोक प्रिय हैं। घर-घर में लोग गणपति की मूर्ति लाकर उसकी पूजा करते हैं।

जय गणपति, जय पार्वती सुत,

गजमुख वंदन, अभिनंदन |

शिव के नंदन, गणनायक,

एकदंत, मस्तक चंदन |

जय गणपति, जय पार्वती सुत

गजमुख वंदन, अभिनंदन |

भूपति, भुवनपति, प्रथमेश्वर

वरदविनायक, बुद्धिप्रिय,

बुद्धिविधाता, सिद्धिदाता

विघ्नेश्वर तुम, सिद्धिप्रिय |

सकल जगत में गूँज रहा है,

आपका ही महिमा मंडन |

जय गणपति, जय पार्वती सुत

गजमुख वंदन, अभिनंदन |

वक्रतुण्ड, कीर्ति, गणाध्यक्ष

महागणपति, एकाक्षर,

एकदंत, मूषकवाहन,

नादप्रतिष्ठित, लंबोदर |

पीताम्बर पट देह पे सोहे,

मंगलमूर्ति करें मंगल |

जय गणपति, जय पार्वती सुत

गजमुख वंदन, अभिनंदन |

  • उमा विश्वकर्मा , कानपुर, उत्तरप्रदेश
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