KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

खिलते हैं होंठ मगर हिलते नहीं

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खिलते हैं होंठ मगर

खिलते हैं होंठ मगर ,हिलते नहीं।
दिल में है बात मगर कहते नहीं ।
वो बेकरार है जानकर अच्छा लगा ।
मुझसे प्यार है जानकर अच्छा लगा।।
चाहते हैं दिल से मगर , जानते नहीं।।

मुझ पर तेरी अदा हमको सच्चा लगा।
प्यार से मिलाते होंगे खुदा सच्चा लगा ।
तरसते हैं मुझ पर, मगर बरसते नहीं ।।

खिलते हैं होंठ मगर…..

– मनीभाई नवरत्न

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