हिंदी दिवस
छोड़ो अब अंग्रेजियत को
लौट आओ हिंदी में तुम ।
जान चुके तुम्हारी विद्वता ,
अब देश बचाओ हिंदी में तुम ।
हिंदी प्रत्याशी बनके
जब मत मांगा हम लोगों का।
अपना भाई जानकर ,
दिल पिघला हम लोगों का ।
पर आज मिजाज बदल गए ,
बोली की गोली से डराते तुम।।
गाथा सुनाते देश के अंग्रेजी में
नहीं बताते हिंदी में तुम ।।
हम तो अंग्रेजी में अंधे हैं
काना बन कर तुम राज करो।
हम हिंदी है हिंदुस्तान में रहते
तुम अंग्रेज बन कर कुछ लाज करो।
ताकत जानी तुमने अंग्रेजी की
नहीं जाने हिंदी की ताकत तुम ।
अंग्रेजी में अब तक जीवित हो ।
खत्म हो जाओगे हिंदी में तुम।।
-मनीभाई नवरत्न




