ले ली जिंदगी ने करवट -मनीभाई नवरत्न

ले ली जिंदगी ने करवट

रहता नहीं यहां; कुछ भी पहले सा।
सब बदल रहा है , तू भी बदल।
छिपता कहां है कुछ भी किसी से,
छिप छिपके , क्या निकले हल?
करना यहां जो भी
सच्चाई के दम पे
कर लेना तू झटपट
ले ली जिंदगी ने करवट ।

बसना नहीं है, बढ़ना है तुझे।
अपनों से रो के लड़ना है तुझे।
खुशियों के घरौंदे, दुख के तिनकों से
आंसू की नमी से गड़ना है तुझे।
अपने हाथों से काबिल हाथों को
सौंपना है पाकर
समय की आहट।
ले ली जिंदगी ने करवट ।

बचपन की बातें, अब बस बातों में।
जवानी रवानी, बीत चली रातों में।
सब मौज किए, बेखौफ किए
अब बस लाठी, कांपते हाथों में।
लाख सपने सजाये
पर कुछ ना हाथ आये
एक वही बुलाये
सबकी मंजिल
सबका घर मरघट।
ले ली जिंदगी ने करवट ।

-मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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