दूध में दरार पड़ गई / अटल बिहारी वाजपेयी
हिंदी कवितादूध में दरार पड़ गई / अटल बिहारी वाजपेयी ख़ून क्यों सफ़ेद हो गया?भेद में अभेद खो गया।बँट गये शहीद, गीत कट गए,कलेजे में कटार दड़ गई।दूध में दरार पड़ गई। खेतों में बारूदी गंध,टूट गये नानक के छंदसतलुज सहम उठी, व्यथित सी बितस्ता है।वसंत से बहार झड़ गईदूध में दरार पड़ गई। अपनी ही
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