प्लमकेक या सत्य?
विरह और दर्दप्लमकेक या सत्य? थोड़ा-सा दुख आएतोकोई प्लमकेक पकड़ा देता है।कोई तोहफ़ा,कोई सैर,कोई ध्यान-भटकाव। आँसू सूख जाते हैं—समाधान से नहीं,प्रतिस्थापन से। दुख गया नहीं,बसमन बहला दिया गया। यही हैसभ्य दुख का इलाज—रो लो थोड़ा,फिर मुस्कुरा लो। कई बारदुख इसलिए भी आता हैक्योंकितुम्हें प्लमकेक चाहिए।ध्यान चाहिए।सांत्वना चाहिए। यह दुखपरिवर्तन नहीं करता,यह माँग करता है।यह अहंकार कीएक और
