कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

Mahatma-Gandhi

महात्मा गांधी – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

महात्मा गांधी – मनीभाई नवरत्न (मौलिक | अतुकांत शैली | संपूर्ण जीवन-गाथा समाहित) एक युग—जिसने सत्य और अहिंसा कोकेवल विचार नहीं,बल्कि जीवन की धड़कन बनाया,उस युग का नाम था—महात्मा गांधी। एक साधारण घर में जन्मा बालक,पर उसकी आत्मा मेंमानो भारत का भविष्य लिखा था। 2 अक्तूबर 1869, पोरबन्दर—समुद्र की लहरों से घिरा छोटा-सा नगर;पर वहाँ

महात्मा गांधी – मनीभाई नवरत्न Read More »

श्रीमती इंदिरा गांधी -मनीभाई नवरत्न

मन और भावनाएँ

श्रीमती इंदिरा गांधी -मनीभाई नवरत्न (मौलिक, अतुकांत, संपूर्ण जीवन-गाथा समाहित कविता) एक बच्ची—जिसके जन्म पर सरोजिनी ने कहा था,“तुम्हारे घर में भारत की नयी भावना ने जन्म लिया है”—वह धीरे-धीरेभारत की आत्मा में धड़कने लगी। आनंद भवन की शांत गलियों में,राजनीति की आहटउसके खेल की धुन में घुली रही।माँ कमला की बीमारी,पिता नेहरू की दूर

श्रीमती इंदिरा गांधी -मनीभाई नवरत्न Read More »

विनोबा भावे — मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

विनोबा भावे — मनीभाई नवरत्न भारत की मिट्टीजब सामाजिक असमानताओं सेथकने लगी थी,जब भूमि और मनदोनों बंटते-बंटतेअपनी करुण पुकार में डूब चुके थे—तब एक शांत साधु उठा,माथे पर तेज,मन में करुणा,और हाथों में केवलअहिंसा का स्पर्श।वह था—विनोबा भावे। महाराष्ट्र के छोटे से गाँव गागोदे मेंएक बालक नेअपनी माँ के भजनों मेंधर्म नहीं,जीवन का सूत्र सीखा।रुक्मणिबाई

विनोबा भावे — मनीभाई नवरत्न Read More »

गुरु नानक देव — मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

गुरु नानक देव — मनीभाई नवरत्न भारत की पुण्य धरती परजब मनुष्य भेद–भाव के अंधकार में बँटा हुआ था,जब धर्म का सारअनुष्ठानों की भीड़ में खो रहा था—तब एक शांत प्रकाश उभरा,जिसने कहा—“ईश्वर एक है, और वह हर हृदय में विद्यमान है।”वही प्रकाश थे—गुरु नानक देव। 1469 ईस्वी, कार्तिक पूर्णिमा—तलवंडी की मिट्टीएक दिव्य बालक से

गुरु नानक देव — मनीभाई नवरत्न Read More »

महावीर स्वामी — मनीभाई नवरत्न

नारी जीवन और संवेदना

महावीर स्वामी — मनीभाई नवरत्न भारत की आध्यात्मिक धरती परजब अहिंसा की रोशनी मंद पड़ रही थी,जब जीवन की पीड़ा कोकोई स्थिर मार्ग नहीं मिलता था—तब एक दिव्य स्वर प्रकट हुआ,जिसने कहा—“शांति बाहर नहीं, अपने भीतर से उपजती है।”वही स्वर बने—महावीर स्वामी। 599 ईसा पूर्व की वह सुबह,कुण्डग्राम की धरतीएक असाधारण आत्मा का स्वागत कर

महावीर स्वामी — मनीभाई नवरत्न Read More »

पं० जवाहरलाल नेहरू -मनीभाई नवरत्न

मन और भावनाएँ

पं० जवाहरलाल नेहरू -मनीभाई नवरत्न इतिहास के पन्नों परएक नामगुलाब की पंखुड़ी–सा कोमल,पर संघर्ष की आग–सा प्रखर—जवाहरलाल नेहरू। राजसी वैभव में जन्मे,पर मन में सादगी का उजाला लिए;14 नवम्बर 1889—मोतीलाल नेहरू की शान,स्वरूप रानी की आँखों का तारा।घर के शिक्षकों से सीखा पहला अक्षर,और जल्द ही इंग्लैण्ड का मार्गउनकी सीख का विस्तार बन गया। हैरो

पं० जवाहरलाल नेहरू -मनीभाई नवरत्न Read More »

डा० भीमराव अम्बेडकर – मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ

डा० भीमराव अम्बेडकर अत्यंत साधारण जीवन में जन्मा एक बालक,जिसके पाँवों में जमी धूल भीएक दिन भारतीय लोकतंत्र की नींव बनने वाली थी। 14 अप्रैल 1891 —रत्नागिरि की उसी धरती पर,जहाँ जाति की दीवारेंइंसान को इंसान होने नहीं देती थीं,वहीं पैदा हुआ भीमराव,जिसे दुनिया बाद में‘बाबासाहेब’ कहकर प्रणाम करने वाली थी। गरीबी, भेदभाव, उपेक्षा—ये उनके

डा० भीमराव अम्बेडकर – मनीभाई नवरत्न Read More »

मदर टेरेसा : ममता और सेवा की मूर्ति -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मदर टेरेसा : ममता और सेवा की मूर्ति -मनीभाई नवरत्न अल्बानिया की धरती से जन्मीयह करुणा की धाराभारत की मिट्टी में समा करपूरी दुनिया की माँ बन गई।दुख को अपना आभूषण,सेवा को अपना धर्मऔर मनुष्य कोईश्वर का ही अंश मानने वालीवह अनूठी शक्ति—यही थीं मदर टेरेसा। स्कोप्जे के छोटे-से घर मेंअगनेस गोंक्सा नाम की एक

मदर टेरेसा : ममता और सेवा की मूर्ति -मनीभाई नवरत्न Read More »

शिवाजी : मेरे आदर्श पुरुष – मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

शिवाजी : मेरे आदर्श पुरुष (अतुकांत कविता) भारत की धरा परजब अन्याय का अंधेरा गहराता गया,जब धर्म, संस्कृति और आत्मगौरवजकड़नों में सिसकने लगे—तभी उठे एक प्रकाश-पुरुष,एक ज्योति जो दिशा भी बनी और संघर्ष भी।यह ज्योति थी—मेरे आदर्श पुरुषछत्रपति शिवाजी महाराज। उनका जन्म शिबनेरी के किले में हुआ—पर वे किले की दीवारों तक सीमित न रहे।जीजामाता

शिवाजी : मेरे आदर्श पुरुष – मनीभाई नवरत्न Read More »

गुरु गोविन्दसिंह — मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

गुरु गोविन्दसिंह — मनीभाई नवरत्न एक ओर शत्रुओं को तलवार से ललकारने वाला,दूसरी ओर कलम से काव्य के मोती बीनने वाला,हाथ पर बाज और हृदय में करुणा छिपाए,धर्म, मानवता और राष्ट्रधर्म के लिएअथक खड़े रहने वाला—वह विलक्षण पुरुष थे गुरु गोविन्दसिंह। पटना की धरती पर23 दिसम्बर 1666 को जन्मेएक प्रकाश…जो आगे चलकरभय और अन्याय के

गुरु गोविन्दसिंह — मनीभाई नवरत्न Read More »

ले ली जिंदगी ने करवट -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

ले ली जिंदगी ने करवट रहता नहीं यहां; कुछ भी पहले सा।सब बदल रहा है , तू भी बदल।छिपता कहां है कुछ भी किसी से,छिप छिपके , क्या निकले हल?करना यहां जो भीसच्चाई के दम पेकर लेना तू झटपटले ली जिंदगी ने करवट । बसना नहीं है, बढ़ना है तुझे।अपनों से रो के लड़ना है

ले ली जिंदगी ने करवट -मनीभाई नवरत्न Read More »

उपभोग का पहाड़ – मनीभाई नवरत्न

प्रकृति और पर्यावरण

🛍️ उपभोग का पहाड़ 🛍️ वे बाज़ार जाते हैंबस एक कपड़ा लेने,पर लौटते हैं —थैले से लदे,मन से खाली। आवश्यकता दरवाज़े पर रह जाती है,लालच भीतर कुर्सी पर बैठ जाता है।“सेल चल रही है”,“एक खरीदो एक मुफ़्त पाओ” —ये जादू के शब्द हैं,जो मनुष्य को वस्तु बना देते हैं। दुकानों में अब वस्त्र नहीं,स्वप्न टंगे

उपभोग का पहाड़ – मनीभाई नवरत्न Read More »

Scroll to Top