मानवता पर कविता -भुवन बिष्ट
Uncategorizedमानवता पर कविता पावन मानवता का संगम, हो नव आशाओं का संचार। नई सोच व नई उमंग से, मानवता की हो जयकार।। प्रभु नित नित वंदन करूँ जयकार।।…… प्रेम भाव का दीप जले, हो हर मन में उजियारा। सारे जग
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