कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

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तू कदम बढाकर देख

हिंदी कविता

•तू कदम बढाकर देख• मंजिल बुला रही है तू कदम बढाकर  देख खुशियाँ गुनगुना रही है तू गीत गाकर देख काँटे ही नहीं पथ में,फूल भी तुम्हें मिलेंगेपतझड़ का गम ना करना, गुलशन भी तो खिलेंगे बहारें बुला रहीं है, कोंपल लगाकर देख पीसती है जब वसुंधरातभी दामन होता है हरातप-तप कर अग्नि में ही

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मुसाफिर हैं हम जीवन पथ के

हिंदी कविता

मुसाफिर हैं हम जीवन पथ के मुसाफिर हैं हम जीवन पथ केराहें सबकी अलग-अलगधूप-छांव पथ के साथी हैंमंज़िल की है सबको ललक। राही हैं संघर्ष शील सबदामन में प्यार हो चाहे कसकपीड़ा के शोलों में है कोईकोई पा जाता खुशियों का फलक। मुसाफिर हूँ मैं उस डगर कीकाँटों पर जो नित रोज चलामधुऋतु हो या

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हाइकु

स्वालंबन पर कविता

हिंदी कविता

स्वालंबन पर कविता स्वालंबन है जीवन अवलंबनबिन स्वावलंब जीवन है बंधनस्वावलंबन ही है आत्मनिर्भरताबिन इसके जीवन दीप न जलता। स्वालंबन जग में पहचान कराताशिक्षा का सदुपयोग सिखातानिराशा में भी आशा भरताऊसर में भी प्रसून खिलाता। अपना दीपक स्वयं बनोस्वालंबन ही है सिखलाताजीने का दृष्टिकोण बदलनास्वालंबी है कर दिखलाता। स्वालंबन है आत्म अवलंबनआत्म अवलंबन जब आता

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deepak

नई उम्मीदें पर कविता

हिंदी कविता

नई उम्मीदें पर कविता मन में आशा के दीप जलाजीवन पथ पर बढ़ना है,उम्मीदें ही जीवन की पूंजीनया आसमान हमें पाना है। नई उम्मीदें संजीवनी जीवन कीसकारात्मक सोच जगाती हैंपथ प्रदर्शक है मनुज कीहौंसले बुलंद बनाती है। बिन उम्मीद मंजिल नहीं दिखतीराही पथभ्रष्ट हो जाता हैउम्मीदों का यदि दामन छोड़ानैराश्य भाव ही पाता है। पथरीला

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doha sangrah

तेरस के दोहे

हिंदी कविता

तेरस के दोहे आयें है संसार मे, करो नेक सब काम।यहीं कर्म का फल मिले, स्वर्ग नरक की धाम।। यत्न सदा करते रहो, मान नही तुम हार।हाथ सफल लगते गले, होत न श्रम बेकार।। बरफ जमी है यूँ जमी, ठिठुर गये सब अंग।कम्बल टोपी ले रखो, पहन ढ़ाक तन संग।। शीत लहर चलने लगी, बरस

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jivan doha

नयी सुबह पर कविता

हिंदी कविता

नयी सुबह पर कविता जिम्मेदारीयों कोकंधो पर बिठाकरकुछ कुछ जरूरतें पूरी करताख्वाहिशो कोआलमारी में बंद करकेगम छुपाकरचेहरे पर एक खामोश हंसीलाता ..सच मे नही है कोई शिकनमेरे माथे पर..क्योंकिबे-हिसाब उम्मीदो सेभरे है जेब मेरे..और अनगिनत ख़्वाब भीदेखे थे पहले कभी..ओह !यह क्या ?दिन निकल गया ये सब सोचते सोचतेअंधेरे ने फैला दियाअपना साम्राज्य फिर सेसच में रात

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हम परिन्दे

हिंदी कविता

हम परिन्दे हम परिन्देहम है मनमौजी सीमा न जाने।। हम परिन्दे घर न पहचाने घूमे अंजाने।। हम परिन्दे उड़ते पंख फैला देश न जानें ।। हम परिन्दे फिरे दरबदर बना लें घर।। हम परिन्देछू लेते आसमान ऊंची उड़ान ।। हम परिन्दे रहें खूब उड़ते नहीं थकते।। राकेश नमित

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yogasan

अब तरूणों को आना होगा

हिंदी कविता

अब तरूणों को आना होगा राष्ट्रवाद का अलख जगाने,अब तरूणों को आना होगा।भारत भू  की  रक्षा खातिर, रक्त बहाने आना होगा। आतंकी असुरों को हम, यूँ कब तक ऐसे झेलेंगे ….भस्मासुर सा नृत्य करा,उनका दिल दहलाना होगा। सोए देश के वीरों जागो,कुछ पहचानो अपने को।आत्म शक्ति जो खोया तुमने, फिर से उसे जगाना होगा। नव

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नया संसार बसायेंगे

नारी जीवन और संवेदना

नया संसार बसायेंगे आओ यह संकल्प करें नया संसार बसायेंगे ।स्वर्ग धरती  पर लायेंगे । जाति धर्म का भेद मिटाकर एकता  का रंग  भरें।हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई भाई भाई संग  फिरें ।मंदिर मस्जिद गुरू द्वारे परअलख जगायेंगे ।नया संसार बसायेंगे स्वर्ग धरती पर लायेंगे । नारी का सम्मान हो जग मेंकोख में बेटी न मरे

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yog divas

अरुणोदय

हिंदी कविता

अरुणोदय प्रतिदिन अरुणोदय हममें जगाती हैस्फूर्ति भोर का समयसुबह की लालिमासूर्य की किरणें पृथ्वी पर आती हैसुखद एहसास होता है वहठंड के मौसम में इंतजार होता हैसभी कोअरुणोदय कापक्षी सारे चहचहाकरअभिनंदन करते हैं वहीं गायें रंभा करइंसान, सूर्य नमस्कार सेअपने दिन की शुरूआत करते हैं सुबह खूबसूरत होतो कहते हैं दिन अच्छा बीतेगा •••! यहाँ

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ज़िंदगी की राह/ निमाई प्रधान’क्षितिज

हिंदी कविता

ज़िंदगी की राह/ निमाई प्रधान’क्षितिज~~~~•●•~~~~ ज़िंदगी की राह..जो तुम चल पड़े हो !देखना..झंझावतों कीभीड़ होगी ,आशियां टूटेगा..हरदम..हर गली में..फिर बसेरे की ज़रूरत-नीड़ होगी !! ज़िंदगी की राह..जो तुम चल पड़े हो!! संसृति का है नियम..ओ रे राही!चलते रहना है..आगे बढ़ते रहना ,अपने आगे आये-हर रुकावटों को ..मोड़ दो..या फिर-मुड़ के बह निकलना !! ज़िंदगी की

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