पानी पर कविता

पानी पर कविता

sagar
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क्षिति जल पावक नभ पवन,जीवन ‘विज्ञ’ सतोल।
जीवन का आधार वर,पानी है अनमोल।।

मेघपुष्प ,पानी सलिल, आप: पाथ: तोय।
*विज्ञ* वन्दना वरुण की, निर्मल मति दे मोय।।

जनहित जलहित देशहित, जागरूक हो *विज्ञ*।
जीवन के आसार तब, जल रक्षार्थ प्रतिज्ञ।।

वारि अम्बु जल पुष्करं, अम्म: अर्ण: नीर।
उदकं, घनरस शम्बरं, *विज्ञ* रक्ष मतिधीर।।

सरिता तटिनी तरंगिणी, द्वीपवती सारंग।
नद सरि सरिता आपगा, जलमाला जलसंग।।

अपगा लहरी निम्नगा, निर्झरिणी जलधार।
सदा सनेही सींचती, करलो *विज्ञ* विचार।।

स्वच्छ रखो जल *विज्ञ* नर, नहीं प्रदूषण घोल।
नयन नीर नर नारि रख, पानी है अनमोल।।

*बाबू लाल शर्मा बौहरा* ” *विज्ञ*”
*सिकंदरा,दौसा,राजस्थान*

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