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#बाबू लाल शर्मा बौहरा

यहाँ पर हिन्दी कवि/ कवयित्री आदर ०बाबू लाल शर्मा बौहरा के हिंदी कविताओं का संकलन किया गया है . आप कविता बहार शब्दों का श्रृंगार हिंदी कविताओं का संग्रह में लेखक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये हैं .

रक्षाबन्धन पर दोहे

रक्षाबन्धन पर दोहे १.🌼रिश्तों का  अनुबन्ध शुभ, रक्षा बन्धन पर्व।सनातनी शुभ रीतियाँ, उत्तम संस्कृति गर्व।।२.🌼पूनम सावन  मास  में, राखी  का त्योहार।भाई का  रक्षा  वचन, हर्षे  बहिन  अपार।।३.🌼विष्णु पत्नि लक्ष्मी शुभे, वे नारद मुनि रंग ।बलि को राखी भेजकर, लाई  हरि हर संग।।४.🌼रीति सनातन काल से, बंधु बहिन का प्यार।सांसारिक शुभ रीति यह, परिवारी…
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बछ बारस पर कविता – दोहा छंद

बछ बारस पर कविता - दोहा छंद hindi doha || हिंदी दोहा बछ बारस सम्मानिए, गौ बछड़े की मात।मिटे पाप संताप तन, दैव प्रमाणित बात।।पावस सावन में मनें, बछ बारस का पर्व।गौ सेवा कर नर मिले, मेवा मंगल गर्व।।भिगो मोठ को लीजिए, उत्तम यह आहार।गौ को मीठे में खिला, बछ बारस व्यवहार।।गौ माताएँ हिन्द हित, बछ सौभाग्य किसान।बछ बारस पर दीजिए, इन्हे…
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मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान में दोहा छंद

आ.मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान म़े सादर समर्पित मुंशी प्रेमचंद्र जी के सम्मान में दोहा छंद Premchand प्रेम चन्द साहित्य में , भारत की त़सवीर।निर्धन,दीन अनाथ की,लिखी किसानी पीर।।सामाजिकी विडंबना , फैली रीति कुरीति।चली सर्व हित लेखनी, रची न झूठी प्रीत।।गाँव खेत खलिहान सब,ठकुर सुहाती मान।गुरबत में ईमान का , पाठ लिखा गोदान।।बूढ़ी काकी…
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भाई पर कुण्डलिया छंद

साहित रा सिँणगार १०० के सौजन्य से 17 जून 2022 शुक्रवार को पटल पर संपादक आ. मदनसिंह शेखावत जी के द्वारा विषय- भाई पर कुण्डलिया में रचना आमंत्रित किया गया. कुंडलियां विधान- एक दोहा + एक रोला छंददोहा -विषम चरण १३ मात्रा चरणांत २१२सम चरण ११ मात्रा चरणांत २१समचरण सम तुकांत होरोला - विषम चरण - ११ मात्रा चरणांत २१सम चरण - १३ मात्रा चरणांत २२ …
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राजस्थान दिवस कविता – बाताँ राजस्थान री

राजस्थान दिवस कविता : प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को हम राजस्थान की अमर गाथा का अपनी सुनहरी यादों में समरण कर इसे राजस्थान दिवस के रूप में मानते है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की परम्परा आज भी राजस्थान में कायम है। 30 मार्च, 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर वृहत्तर राजस्थान संघ बना था। इसी तिथि को राजस्थान की…
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शिव महाकाल पर कविता – बाबू लाल शर्मा

हे नीलकंठ शिव महाकाल भक्ति गीत- हे नीलकंठ शिव महाकाल (१६,१४मात्रिक) हे नीलकंठ शिव महाकाल,भूतनाथ हे अविनाशी!हिमराजा के जामाता शिव,गौरा के मन हिय वासी!देवों के सरदार सदाशिव,राम सिया के हो प्यारे!करो जगत कल्याण महा प्रभु,संकट हरलो जग सारे!सागर मंथन से विष पीकर,बने देव हित विश्वासी!हे नीलकंठ शिव महाकाल,भूतनाथ हे अविनासी!भस्म रमाए शीश चंद्र…
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महादेवी वर्मा पर कविता- बाबूलाल शर्मा

प्रस्तुत कविता हिंदी साहित्य के विख्यात छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा पर लिखी गई है ।जिसके रचयिता बाबूलाल शर्मा जी हैं ।आपने दोहे छंद पर यह कविता लिखी है।
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आ बैठे उस पगडण्डी पर – बाबू लाल शर्मा

आ बैठे उस पगडण्डी पर - बाबू लाल शर्मा HINDI KAVITA || हिंदी कविता आ बैठे उस पगडण्डी पर,जिनसे जीवन शुरू हुआ था।बचपन गुरबत खेलकूद में,उसके बाद पढ़े जमकर थे।रोजगार पाकर हम मन में,तब फूले ,यौवन मधुकर थे।भार गृहस्थी ढोने लगते,जब से संगिनी साथ हुआ था।आ बैठे उस पगडण्डी परजिनसे जीवन शुरू हुआ था।रिश्तों की तरुणाई हारी,वेतन से खर्चे रोजाना।बीबी बच्चों…
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बाबूलाल शर्मा के लावणी छंद

बाबूलाल शर्मा के लावणी छंद Table of Contentsकाव्य रंगोली- लावणी छंद प्यारी  पृथ्वी बेटी -बाबूलाल शर्मा (लावणी छंद)पर्यावरण संरक्षणधरा पुत्र मातृशक्तिगया साल ये गया गयामाँअमर शहीदआतंकवाद एक खतरा लेखनी काव्य रंगोली- लावणी छंद पूजा की थाली सजती हैअक्षत पुष्प रखें रोली।काव्यजगत में ध्रुव सी चमके,कवि प्रिया,काव्य रंगोली।हिन्दी साहित सृजन…
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