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#केवरा यदु मीरा

यहाँ पर हिन्दी कवि/ कवयित्री आदर०केवरा यदु मीरा के हिंदी कविताओं का संकलन किया गया है . आप कविता बहार शब्दों का श्रृंगार हिंदी कविताओं का संग्रह में लेखक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये हैं .

भोजन पर दोहे का संकलन

15 जून 2022 को साहित रा सिंणगार साहित्य ग्रुप के संरक्षक बाबूलाल शर्मा 'विज्ञ' और संचालक व समीक्षक गोपाल सौम्य सरल द्वारा " भोजन " विषय पर दोहा छंद कविता आमंत्रित किया गया जिसमें से भोजन पर बेहतरीन दोहे चयनित किया गया। जो कि इस प्रकार हैं- भोजन पर दोहे का संकलन मदन सिंह शेखावत के दोहे सादा भोजन कर सदा, करे परहेज तेल।पेट रहे आराम…
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रोटी पर 5 बेहतरीन कविताएं -चौपाई छंद

13 जून 2022 को साहित रा सिंणगार साहित्य ग्रुप के संरक्षक बाबूलाल शर्मा 'विज्ञ' और संचालक व समीक्षक गोपाल सौम्य सरल द्वारा " रोटी" विषय पर चौपाई छंद कविता आमंत्रित किया गया जिसमें से रोटी पर 5 बेहतरीन कविताएं चयनित किया गया। जो कि इस प्रकार हैं- कविता 1 भूख लगे तब रोटी खाना।तभी लगे वह स्वाद खजाना।।कच्ची भूख में नहीं खाना।चाहे मन को…
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महानदी पर कविता – केवरा यदु

मोर महानदी के पानी मा - केवरा यदु kavita bahar चाँदी कस चमके चम चम जिंहा चंदा नाचे छम छम ।सोंढू पैरी के संगम भोले के ड़मरु ड़म ड़म ।मोर महानदी के पानी मा।महानदी के बीच में बइठे शिव भोला भगवान ।सरग ले देवता धामी आके करथें प्रभू गुणगान ।माता सीता बनाइस शिव भोले ला मनाइस मोर महानदी के पानी मा।चाँदी कस चमके चम चम--ईंहा बिराजे…
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केंवरा यदु मीरा: मन से तृष्णा त्याग

केंवरा यदु मीरा: मन से तृष्णा त्याग मन से तृष्णा त्याग कर,जपे राम का नाम ।हो तृष्णा का जब शमन,मिले मोक्ष का धाम ।।तृष्णा मन से मारिये ,बन जाता है काल।कौरव को ही देख लो, कितना किया बवाल ।।जीने की है चाह बहु,रब चाहे वह होय।तड़प तड़प कर क्या जियें, काहे मनवा रोय।।झूठा कपट फसाद है,तृष्णा का ही मूल।तृष्णा को तू मार दे, जगा नहीं कर भूल।।लालच सबसे है…
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शिव स्तुति – केंवरा यदु मीरा

शिव स्तुति - केंवरा यदु मीरा चौपाई छंद जय जय जय भोले त्रिपुरारी ।तुमहो भक्तों के दुख हारी।।माथे चंदा सिर पर गंगा ।गल पे सोहे हार भुजंगा।।सँग में सोहे गौरी माता ।तुमहो सबके भाग्य धाता।।कहलाते भोले भंडारी ।तुमहो प्रभु त्रिपदा भय हारी।।भूत प्रेत के तुम हो स्वामी।जगत नियंता अंतर्यामी ।।करते हो तुम बैल सवारी।तीन नेत्र की महिमा भारी।।डमरू धर…
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राम नाम जपले रे मनवा गीत

राम नाम जपले रे मनवा गीत राम नाम जपले रे मनवा,निश दिन सांझ सबेरे।पल में सारे कट जायेंगे,जीवन के दुख तेरे। राम नाम जपती थी शबरी,मन में आस लगाये।फूल बिछाती रही राह में,राम प्रभू जी आये।उसके सिवा न कोई समझो, मानव जग में तेरे ।पल में सारे कट जायेंगे, जीवन के दुख तेरे।। द्रुपत सुता जब सभा बीच में,बेबस आन पड़ी थी।टेर लगाई आजा मोहन,कैसी विपद…
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सिद्धिविनायक गणेश वंदना

सिद्धिविनायक गणेश वंदना सिद्धिविनायक देव हो,तुझे मनाऊँ आज।माँ गौरी शंकर सुवन,हो पूरण मम काज।। प्रथम पुज्य गणराज जी, बुद्धि विधाता नाथ।कष्ट हरो गणनायका,चरण झुकाऊँ माथ।। मातु पिता करि परिक्रमा,सजते देव प्रधान।बुद्धि विनायक हैं कहे,कृपा करो भगवान ।। गणेशजी मोदक प्रिय गौरी तनय,एक दंत अखिलेश।हाथ जोड़ विनती करूँ, करो दया करुनेश।। …
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नमन है मेरे गुरुवर -केवरा यदु मीरा

नमन है मेरे गुरुवर -केवरा यदु मीरा शिक्षक ईश समान है, कर गुरु का सम्मान।अक्षर अक्षर जोड़ कर,बाँटे जो नित ज्ञान।बाटे जो नित ज्ञान,शिष्य को योग्य बनाते।ज्ञान ज्योति ले हाथ,सदा सत राह दिखाते।मात पिता भगवान,बने बच्चों का रक्षक।नमन करें सौ बार,ब्रम्ह का रुप है शिक्षक ।। गुरुवर तुमको है नमन, चरणों में शत बार।झोली भरदो ज्ञान से,…
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राधा पुकारे तोहे श्याम- केवरा यदु मीरा की भजन

जिसका प्रकार भक्तिकाल में मीरा अपने श्रीकृष्ण के भक्ति में रंग गई थी, वैसे ही आज राजिम की कवयित्री केवरा यदु मीरा अपने श्याम के रंग में रंगकर अपना भजन लिखी जा रही है. उनके भजन संग्रह में से
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