3rd रविवार जून फादर्स डे पर हिंदी कविता

पिता पर कविता (Pita Par Kavita)

समाज और यथार्थ

फादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व हैं जिसमे पितृत्व (फादरहुड), पितृत्व-बंधन तथा समाज में पिताओं के प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। अनेक देशों में इसे जून के तीसरे रविवार, तथा बाकी देशों में अन्य दिन मनाया जाता है। यह माता के सम्मान हेतु मनाये जाने […]

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बातें पिता पद की- बाबूलाल शर्मा

हिंदी कविता

बातें पिता पद की- बाबूलाल शर्मा सजीवन प्राण देता है,सहारा गेह का होते।कहें कैसे विधाता है,पिताजी कम नहीं होते। मिले बल ताप ऊर्जा भी,सृजन पोषण सभी करता।नहीं बातें दिवाकर की,पिता भी कम नही तपता। मिले चहुँओर से रक्षा,करे हिम ताप से छाया।नहीं आकाश की बातें,पिताजी में यहीं माया। करे अपनी सदा रक्षा,वही तो शत्रु के

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पिता पर दोहे

हिंदी कविता

पिता पर दोहे पिता क्षत्र संतान के, हैं अनाथ पितुहीन।बिखरे घर संसार वह,दुख झेले हो दीन।। कवच पिता होते सदा,रक्षित हों संतान।होती हैं पर बेटियाँ, सदा जनक की आन।। पिता रीढ़ घर द्वार के,पोषित घर के लोग।करें कमाई तो बनें,घर में छप्पन भोग।। पिता ध्वजा परिवार के, चले पिता का नाम।मुखिया हैं करते वही ,

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पिता सदा आदर्श हैं (पिता पर दोहे)

हिंदी कविता

पिता सदा आदर्श हैं (पिता पर दोहे) ख्याल रखें संतान का, तजकर निज अरमान।खुशियाँ देते हैं पिता, रखतें शिशु का ध्यान। ।१ मुखिया बन परिवार का , करतें नेह समान ।पालन पोषण कर पिता , बनते हैं भगवान ।।२ जिसकी ऊँगली थामकर , चलना सीखें आज ।मातु–पिता को मान दें, करें हृदय में राज।।३ शीतल

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पिता धर्म निभना अति भारी-बाबू लाल शर्मा

समाज और यथार्थ

फादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व हैं जिसमे पितृत्व, पितृत्व-बंधन तथा समाज में पिताओं के प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाया जाता है। अनेक देशों में इसे जून के तीसरे रविवार, तथा बाकी देशों में अन्य दिन मनाया जाता है।

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मैं तेरा बीज – पिता पर विशेष

हिंदी कविता

मैं तेरा बीज – पिता पर विशेष मैं तेरा बीज – पिता पर विशेषहे पिता!मैं तेरा बीज हूँ।माँ की कोख मेंजो अंकुरित हुया ।जब-जब भुख लगी माँ,तेरे धरा का रसपान किया।गोदी में बेल की भांतिलिपटा और भरपूर जीया। तेरे खाद-पानी से पितापौधा से बना पेड़।मेरे आँखो में सदा बसा रहामाली की छवि में एक ईश्वर।

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पिता पर कविता~बाबूलाल शर्मा

हिंदी कविता

पिता पर कविता-बूलालशर्मा पिता ईश सम हैं दातारी। कहते कभी नहीं लाचारी। देना ही बस धर्म पिता का। आसन ईश्वर सम व्यवहारी।१ तरु बरगद सम छाँया देता। शीत घाम सब ही हर लेता! बहा पसीना तन जर्जर कर। जीता मरता सतत प्रणेता।२ संतति हित में जन्म गँवाता। भले जमाने से लड़ जाता। अम्बर सा समदर्शी

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