रोटी पर कविता
सांसरिक सत्य तो
यह है कि
रोटी होती है
अनाज की
लेकिन भारत में रोटी
नहीं होती अनाज की
यहाँ होती है
अगड़ों की रोटी
पिछड़ों की रोटी
अछूतों की रोटी
फलां की रोटी
फलां की रोटी
और हां
यहाँ पर
नहीं खाई जाती
एक-दूसरे की रोटी
-विनोद सिल्ला
✅ लिंक कॉपी हो गया!

Sahi baat sir, smaaj ki sachai
बहुत बढ़िया सर
धन्यवाद रामपाल इंदौरा व सरदानंद जी