सलाम हुजूर तुझे मेरा सलाम

सलाम हुजूर तुझे मेरा सलाम

तेरी जुल्फों की छैयां तले है अपना मकान ।
तेरे आशिकों के बही खाते में है अपना नाम ।
सलाम हुजूर तुझे मेरा सलाम

सुने हैं मेरे कानों में तेरे अदाओं के चर्चे
बटे हैं जगह जगह तेरे कलाओं के परचे।
लिखे हैं बस मैंने तेरे.तारीफों के कलाम ।
सलाम हुजूर तुझे मेरा सलाम ।

सजाया है तुझे नैनों में रब का तस्वीर बनाकर।
बसाया है तुझे रूह में सब से छुपा कर ।
तलाश थी तुझे हर डगर दीदार को ये आवाम।
सलाम हुजूर तुझे मेरा सलाम।।

lyrics by: मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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