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#कमला प्रसाद द्विवेदी

सबकी प्यारी भूमि हमारी, धनी और कंगाल की। जिस धरती पर गई बिखेरी, राख जवाहरलाल की ।।दबी नहीं वह क्रांति हमारी, बुझी नहीं चिनगारी है। आज शहीदों की समाधि वह, फिर से तुम्हें पुकारी है। इस ढेरी को राख न समझो, इसमें लपटें ज्वाल की। जिस धरती पर... ॥१॥जो अनंत में शीश उठाएं,…
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