HINDI KAVITA || हिंदी कविता

निर्लज्ज कामदेव

निर्लज्ज कामदेव   ओ निर्लज्ज कामदेवतू न अवसर देखता है,न परिस्थितियाँन जाति देखता है, न आयुन सामाजिक स्तरयहाँ तक कि, कभी कभीतो रिश्ता भी नहीं देखतादेशों की सीमाएं ,तेरे लियेकोई मायने नहीं रखतीं. तेरे कारण हीन जाने कितने घर टूटेआज भी टूट रहे हैं,न जाने कितनी हत्याएं हुईंआज भी हो रही हैंकितने कारागार भर गयेनये कारागार …

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