आना कभी गाँव में – बलवंत सिंह हाड़ा

आना कभी गाँव में – बलवंत सिंह हाड़ा धरती के आंगन मेअंबर की  छाँव मेंआना कभी गाँव में।। बरगद की डाल पेगाँव की चौपाल पेखुशी के आँगन मेंझुला झुलने कोआना कभी गाँव में।। संध्या के गीत सुननेलोक कलाए देखनेदादी की कहानी सुननेआना कभी गाँव में।। खेतों की मेड़ पेसरसों के खेत पेहरियाली देखनेआना कभी गाँव …

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