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#बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

यहाँ पर हिन्दी कवि/ कवयित्री आदर ० बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’ के हिंदी कविताओं का संकलन किया गया है . आप कविता बहार शब्दों का श्रृंगार हिंदी कविताओं का संग्रह में लेखक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये हैं .

पीयूष वर्ष छंद (वर्षा वर्णन) बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

पीयूष वर्ष छंद (वर्षा वर्णन) बासुदेव अग्रवाल 'नमन' बिजलियों की गूंज, मेघों की घटा।हो रही बरसात, सावन की छटा।।ढोलकी हर ओर, रिमझिम की बजी।हो हरित ये भूमि, नव वधु सी सजी।। नृत्य दिखला मोर, मन को मोहते।जुगनुओं के झूंड, जगमग सोहते।।रख पपीहे आस, नभ को तक रहे।काम-दग्धा नार, लख इसको दहे।। पीयूष वर्ष छंद विधान:- यह 19 मात्रा का सम पद मात्रिक…
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राखी पर कविता (चौपइया छंद ) बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

(चौपइया छंद) यह प्रति चरण 30 मात्राओं का सममात्रिक छंद है। 10, 8,12 मात्राओं पर यति। प्रथम व द्वितीय यति में अन्त्यानुप्रास तथा छंद के चारों चरण समतुकांत। प्रत्येक चरणान्त में गुरु (2) आवश्यक है, चरणान्त में दो गुरु होने पर यह छंद मनोहारी हो जाता है।इस छंद का प्रत्येक यति में मात्रा बाँट निम्न प्रकार है।प्रथम यति: 2 - 6 - 2द्वितीय…
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अयोध्या मंदिर निर्माण

अयोध्या मंदिर निर्माण अवधपुरी भगवा हुई, भू-पूजन की धूम। भारतवासी के हृदय, आज रहे हैं झूम।। दिव्य अयोध्या में बने, मंदिर प्रभु का भव्य। सकल देश का स्वप्न ये, सबका ही कर्तव्य।। पाँच सदी से झेलते, आये प्रभु वनवास। असमंजस के मेघ छंट, पूर्ण हुई अब आस।। मन में दृढ संकल्प हो, कछु न असंभव काम। करने की ठानी तभी, खिला हुआ…
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