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@कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी दीपावली पर हिंदी कविता

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी दीपावली
यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं।

दिवाली पर कविता हिन्दी में

दिवाली पर कविता हिन्दी में नीचे दिए जा रहे हैं Table of Contentsदीपावली पर दोहेअपनी दीवाली आई है दीपावली का आया त्यौहार  घर-घर दीप जले जगमग दीप जले घर-घर में dipawali rangoli दीपावली पर दोहे *दीपक* एक  जलाइये, तन  माटी  का  मान।मन की करिये वर्तिका, ज्योति जलाएँ ज्ञान।।*पावन* मन त्यौहार हो, तम को  करना भेद।श्रम करिये  कारज सधे, बहे…
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प्रति दिवस दीपावली- डी कुमार -अजस्र

प्रस्तुत रचना //प्रति- दिवस दीपावली //डी कुमार --अजस्र द्वारा स्वरचित है जिसमें एक दिवस दीपावली की जगमग और खुशहाली को प्रति दिवस खुशहाली और जगमग में परिवर्तन का आवाहन है
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अयोध्या की दीपावली – आशीष कुमार

प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक "अयोध्या की दीपावली" है जो कि आशीष कुमार, मोहनिया, बिहार की रचना है इसे प्रभु राम के 14 वर्षों बाद अयोध्या आगमन पर मनाए जाने वाले प्रकाश पर्व दीपावली को आधार मानकर रचा गया है
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एक दीप जलाएं उनके नाम -डी कुमार अजस्र

कविता 'एक दीप जलाएं उनके नाम, के द्वारा रचयिता डी कुमार-अजस्र द्वारा दीपावली पर आमजन से वीर सैनिकों और देश के लिए हुए शहीदों के प्रति कृतज्ञता प्रदर्शित करते हुए उनके नाम एक दीपक जलाने का आह्वान किया गया है ।
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चार दीयों से खुशहाली

चार दीयों से खुशहाली चार दीयों से खुशहाली ( लावणी छंद ) एक दीप उनका रख लेना, तुम पूजन की थाली में।🌹जिनकी सांसे थमी रही थी, भारत की रखवाली में.!!🌹एक दीप की आशा लेकर, अन्न प्रदाता बैठा है। ।🌹शासन पहले रूठा ही था, राम भी जिससे रूठा है।🌹निर्धन का धर्म नही…
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तब होगी सच्ची दीपावली – दीपावली पर कविता

शुभ दीवाली आई है- कविता - मौलिक रचना - अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम" तब होगी सच्ची दीपावली तब होगी सच्ची दीपावली कुछ फूलों के खिलने से।दिल में प्रेम के पलने से।तब सच्ची है ये दीपावली।मन में दीयों के जलने से।1। चिरागों के यूँ जलने पर।यश सुख वैभव हो हर घर।तब सच्ची है ये दीपावली।जब रौनक हो हर गांव शहर।2। मासूम बच्चों के चेहरे में।खिलखिलाती…
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अमावस्या पूनम बनने को अड़ी है

Kavita Bahar || कविता बहार अमावस्या पूनम बनने को अड़ी है-------------------सजे हैं बाजार जगमगाता शहर है,दीपोत्सव आया आनंद लहर है,अंधेरे से आज दीपों की ठनी है,अमावस्या पूनम बनने को अड़ी है।बड़े बच्चे सबके खुशी की घड़ी है हर द्वार वंदनवार फूलों की लड़ी है।स्वागत में माँ लक्ष्मी के सब खड़े हैं,फूट रहे हैं पटाखे जली फुलझड़ी है।खुशी ही खुशी सबके…
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जगमग दीया जलाबो

चक चंदन दिखे सुघ्घर,लिपे -पोते घर आंगन उज्जर !जगमग दीया जलाबो,लक्ष्मी दाई ल मनाबो ! पावन पबरीत परब आए हे,मिल -जुल के मनाबो !मया पिरीत के दीया म संगीसुनता के बाती लगाबो !बिरबिट कारी ये अंधियारी , सुरहुती मभगाबो ! जाति -धरम के खोचका -डिपरा,मेड़पार बरोबर करबो !परे- डरे गीरे -थके के,दुख -पीरा ल हरबो !गरीब गुरवा के कुरिया मचंदा- चंदईनी ऊगाबो!🙏🙏🙏🙏…
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