कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी दीपावली

जलते हैं यह दिये

#poetryinhindi,#hindikavita, #hindipoem, #kavitabahar# HAPPY DIWALI सच्चाई की जीत लिए ।खुशियों की जीत लिए ।जलते हैं यह दिये ,दीपावली के लिए ।दुनिया की Darkness, Light  हो ।हर जगह freshness bright  हो ।और…

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दीया बन प्रकाश करे-मदन सिंह शेखावत ढोढसर

[26/10/2019, 08:19] Madan Singh: होडा होड म मर रिया,म्हारा भाई लोग। समझाया माने नही,फैला अणुतो रोग। फैला अणुतो रोग,होड म गोडा कुटीजे। किणकी करले होड,लैणो ले भात भरिजे। कवै मदन…

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चलो फिर आज खुश होकर, दिवाली को मनाएँ हम-प्रवीण त्रिपाठी जी की कविता का आनंद लें

दीपावली विशेष कविताचलो इस बार फिर मिल कर, दिवाली को मनाएँ हम।हमारा देश हो रोशन, दिये घर-घर जलाएँ हम।मिटायें सर्व तम जो भी, दिलों में है भरा कब से।करें उज्ज्वल…

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अमर पंकज(डाॅ अमर नाथ झा) का दीपावली पर बेहतरीन ग़ज़ल, जरूर पढ़िये

ग़ज़लः रात भर मंज़ूर जलना, जोत ने जतला दियादूर करके हर अँधेरा दीप ने दिखला दियाघिर गया था हर तरफ़ से, रात काली थी बहुत चाँद ने हँस कर मुझे पर…

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डॉ सुशील शर्मा द्वारा रचित दीपावली पर्व आधारित सुंदर दोहे

दीपावली पर दोहेडॉ सुशील शर्मा नई ज्योति के पंख हों ,ज्योतिर्मय हर द्वार।तिमिर न अब बाकी बचे ,नेह भरा संसार।आज अमावस रात है ,तिमिर हँसे चहुँओर।एक दीप जब जल उठा…

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कवि बाँके बिहारी बरबीगहीया द्वारा रचित दीपावली पर्व आधारित कविता ,जो हमें आपस में मिलजुल कर रहने का संदेश देती है

शुभ दिन आज दीपोत्सव आयाअपने संग खुशी उमंग को लाया।सजा-धजा हर घर का कोनारंग-बिरंगी खुशियाँ है लाया।आपसी बैर कटुता को मिटाकरमिलजुल कर रहने को सिखाया।सत्य,धर्म,तप,त्याग के बल परप्रभु का पर्व…

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कवयित्री कुसुम लता पुंडोरा द्वारा रचित दीपावली पर्व आधारित कविता, जिसमें यह सुंदर ढंग से बताई गई है कि दीपावली कैसे मनाई जाये

*दीपावली*   जोश उमंग घर आँगन छाए,प्रकाश पर्व दीवाली आई ।अंधकार अंतस का हरने, दीपों की रोशनी लाई ।माटी के दीप जले घर आंगन,रंगोली भी छटा बिखराए।लक्ष्मी गणेश अर्चन वंदन प्रभु श्रीराम मंदिर…

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कवि बाबू लाल शर्मा,बौहरा द्वारा रचित दीपक पर 7 दोहे जो मानव को शिक्षा दे रही है ,आप जरुर पढ़िए

दीपक  (दोहा छंद)    एक दीप बस एक ही, डरे न तम से मीत।शेर अकेले  देखिये, मन तुम रहो अभीत।।धरा  एक दीपक जले, तारक  गगन अनंत।हिम्मत  कभी  न  हारता, तेल बाति…

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कवयित्री वर्षा जैन “प्रखर” द्वारा रचित दीपावली की कविता जो कि आस का दीपक जलाये रखने की शिक्षा दे रही है।

------------------------------*दीपावली* की पावन बेलामहकी जूही, खिल गई बेला*धनवंतरि* की रहे छायानिरोगी रहे हमारी काया*रूप चतुर्दशी* में निखरे ऐसेतन हो सुंदर मन भी सुधरेमहालक्ष्मी की कृपा परस्परहम सब पर हरदम ही…

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बोधन राम निषादराज “विनायक” द्वारा रचित दीपावली आधारित कविता जो आपका मन मोह लेगी ,जरूर पढ़िये

ताटंक छन्द - शुभ दीपावली ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~जगमग दीप जले घर-घर में,                लेकर खुशियाँ आयी है।रंग-बिरंगी    परिधानों   में,             …

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