~लावणी छंद

भोर वंदन- नवनिर्माण करें

भोर वंदन-नवनिर्माण करें ====लावणी छन्दगीत 16,14 पदांत 2==== सत्य सर्वदा अपनाएँ हम, न्योछावर निज प्राण करें।…राम राज्य आधार शिला ले,आओ नवनिर्माण करें।।… सत्य विकल तो हो सकता है, नहीं पराजय अंत मिले।झूठी चादर ओढ़े कलयुग, जयचंदों सह संत मिले।।कुपित मौलवी और पादरी, भ्रष्टाचारी पंत मिले।विषमय रक्त प्रवाहित होता, दंश मनुज के दंत मिले।। उदाहरण हम …

भोर वंदन- नवनिर्माण करें Read More »

नारी का सम्मान करो

नारी का सम्मान करो लावणी छंदवेद ग्रंथ में कहें ऋचाएँ, जड़ चेतन में ध्यान धरो।.जननी भगिनी बिटियाँ पत्नी, नारी का सम्मान करो।.. नारी से नर नारायण हैं, नारी सुखों की खान है।प्रसव वेदना की संधारक, नारी कोख़ बलवान है।ममता की मूरत है जग में,सुचिता शील वरदान है।ज्वाला रूप धरे नारी तब, लागे ग्रहण का भान …

नारी का सम्मान करो Read More »

You cannot copy content of this page