पतझड़ और बहार/ राजकुमार ‘मसखरे’
पतझड़ और बहार/ राजकुमार ‘मसखरे’ ये घुप अंधेरी रातों मेंधरा को जगमग करने दीवाली आती जो जगमगाती ! सूखते,झरते पतझड़ मेंशुष्क जीवन को रंगनेवो होली … Read more
पतझड़ और बहार/ राजकुमार ‘मसखरे’ ये घुप अंधेरी रातों मेंधरा को जगमग करने दीवाली आती जो जगमगाती ! सूखते,झरते पतझड़ मेंशुष्क जीवन को रंगनेवो होली … Read more
११ मात्रिक नवगीत – पीत वर्ण पात हो घाव ढाल बन रहे. स्वप्न साज बह गये।. पीत वर्ण पात हो. चूमते विरह गये।। काल के … Read more