26 नवंबर संविधान दिवस पर कविता

संविधान का मान तिरंगा है

हिंदी कविता

संविधान का मान तिरंगा है तीन रंग से बना हुआ ये संविधान का मान तिरंगा है। पूरे जग में सबसे न्यारा आन बान अरु शान तिरंगा है।। जाति पांति के भेद मिटाता ये हम सबकी करता रखवाली। तीन रंग इसके अंदर है लहराता ये तब बजती ताली।। लोकतंत्र का है प्रतीक ये न्याय दिलाता जान […]

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संविधान का सम्मान – अखिल खान

समाज और यथार्थ

संविधान का सम्मान स्वतंत्रता के खातिर,कितने गंवाएं हैं प्राण,संविधान के लिए,वीरों ने दी है अपनी जान।अस्पृश्यता,दुर्व्यवहार में लिप्त था समाज,समाज में अत्याचारी-राक्षस,करते थे राज।दु:खियों,बेसहारों का होता था नित अपमान,प्यारे हिन्दवासी किजीए,संविधान का सम्मान। एक – रोटी के टुकड़े के लिए,तरसते थे जन, आजादी के लिए पुकारता,धरती और गगन। ज्ञान की रोशनी से दूर हुआ,जुल्म का

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doha sangrah

संविधान पर दोहे

हिंदी कविता

——संविधान—— सपने संत शहीद के,थे भारत के नाम।है उन स्वप्नों का सखे, संविधान परिणाम।। पुरखों ने निज अस्थियों,का कर डाला दाह।जिससे पीढ़ी को मिले, जगमग ज्योतित राह।। संविधान तो पुष्प है, बाग त्याग बलिदान।अगणित अँसुवन धार ने,सींची ये मुस्कान।। भीमराव अंबेडकर,थे नव भारत दूत।संविधान शिल्पी कुशल, सच्चे धरा सपूत।। लोकतंत्र संदर्भ में, संविधान का अर्थ।ऐसी

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doha sangrah

संविधान दिवस को समर्पित दोहे

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

संविधान दिवस को समर्पित दोहे संविधान में लिख गए, तभी मिले अधिकार।बाबा साहब आप को, नमन करें शत बार।। संविधान ने ही दिया, मान और सम्मान।वरना तो हम थे सभी,खुशियों से अनजान।। संविधान से ही मिला, जीवन का अधिकार।वरना तो खाते रहे, वर्णाश्रम की मार।। छुआछूत भी कम हुआ, शुद्र हुए आजाद।जात-पात को खत्म कर,किए

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संविधान शुभचिंतक सबका

हिंदी कविता

संविधान शुभचिंतक सबका (आल्हा छंद) विश्लेषकजन का विश्लेषण, सुधीजनों का है उपहार।संविधान शुभचिंतक सबका, बांटे जो जग में अधिकार।। जन मानस सब विधि के सम्मुख, कहते होते एक समान।अपने मत का पथ चुन लें हम, शिक्षा का भी मुक्त विधान।।समता से अवसर हो हासिल, सबके सपने हों साकार।संविधान शुभचिंतक सबका, बांटे जो जग में अधिकार।।

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संविधान दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

संविधान दिवस पर कविता हांमैं सेकुलर हूँसमता का समर्थक हूँमैं संविधान प्रस्त हूँसेकुलर होना गुनाह नहीं गुनाह हैसांप्रदायिक होनागुनाह हैजातिवादी होनागुनाह हैपितृसत्ता कासमर्थक होनागुनाह हैभाषावादी होनागुनाह हैक्षेत्रवादी होनागुनाह हैभेदभाव कापोषक होना। -विनोद सिल्ला©

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