चिड़िया पर कविता

थके पंछी

थके पंछी आज
फिर तूँ उड़ने की धारले,
मुक्त गगन है सामने
तूँ अपने पंख पसारले।

देख नभ में, नव अरुणोदय
हुआ प्रसूनों का भाग्योदय,
सृष्टि का नित नूतन वैभव
साथियों का सुन कलरव
अब हौंसला संभाल ले ।

शीतल समीर बह रहा
संग-संग चलने की कह रहा,
तरु शिखा पर झूमते
फल फूल पल्लव शोभते
त्याग दे आलस्य निद्रा
अवरुद्ध मग विकास का
आज अब तो तूँ खोज ले।

सरिता की बहती धारा
झरते निर्झर का नजारा,
धर्म उनका सतत बढना
जब तक ना मिले किनारा।
व्यवधान की परवाह न कर
बढने का मंत्र विचार ले।

टूट जायेंगे अड़चनों के शिखर,
संशय चट्टानें जायेंगी, बिखर
मुस्कुराती मंजिलों का काफिला,
सामने आ जायेगा नजर ।
बढ खुशी से मिली हुई
सौगत को संभाल ले।
तूँ अपने पंख पसार ले

पुष्पा शर्मा”कुसुम”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top