कोरोना महामारी पर कविता

कोरोना महामारी पर कविता उथल -पुथल हो चला भूमंडलधरणी पे मची है हाहाकारहै काल के भय से जगत मौनहर ओर मनुज का चीख -पुकारजागो संभलो अब हे मानवदो अपने राजा का साथविश्व का कल्याण करने कोकरो कहीं एकांत निवास ।। शत्रु का वेग है बहुत प्रबलहै उसका रूप बहुत विकरालबंद हो जाओ मौन गुफा मेंओ […]

कोरोना महामारी पर कविता

korona
कोरोना

उथल -पुथल हो चला भूमंडल
धरणी पे मची है हाहाकार
है काल के भय से जगत मौन
हर ओर मनुज का चीख -पुकार
जागो संभलो अब हे मानव
दो अपने राजा का साथ
विश्व का कल्याण करने को
करो कहीं एकांत निवास ।।

शत्रु का वेग है बहुत प्रबल
है उसका रूप बहुत विकराल
बंद हो जाओ मौन गुफा में
ओ मेरे भारत के लाल
हे मानव इस विकट घड़ी में
पकड़ो निज राजा का हाथ
ध्यान धरो एकांत में जाकर
रोक लो तुम अपना विनाश ।।

किसका दोष है किसकी साजिश
हमें न देना इसपर ध्यान
दिग दिगंत तक एक संदेश हो
सम्पूर्ण जगत का होय कल्याण
शांतिदूत अपने राजा का
ध्यानपूर्वक तुम सुनो बात
अटल रहे स्वाभिमान हमारा
दृढ़ रहे उनका विश्वास ।।

जीत जाएंगे हम ओ साथी
जब दोगे तुम इक आवाज
संकल्प करो एकांत रहेंगे
हम करेंगे फिर से नई आगाज
प्रेम रूपी इस प्रेम धरा का
राजा हीं ईशवर और नाथ
विश्व का कल्याण करने को
करो कहीं एकांत निवास ।।

जागो संभलो अब हे मानव
दो अपने राजा का साथ ।।

?समय के कुचक्र को देखते हुए मैंने ये रचना लिखी है ?
?बाँके बिहारी बरबीगहीया ?

?सर्वाधिकार सुरक्षित ?

?????????

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