January 2020

गुण की पहचान पर कविता

हिंदी कविता

गुण की पहचान पर कविता वन में दो पक्षी, दिख रहे थे एक समान।कौन हंस है कौन बगुला, कौन करे पहचान। बगुला बड़ा था घमंडी, कहता मेरे गुण महान।तेज उड़ सकता हूं तुझसे, कह रहा था सीना तान। झगड़ा सुनकर कौवा आया, श्रेष्ठता के लिए करो उड़ान।नम्र भाव से होकर हंस तैयार, उड़ चला दूर […]

गुण की पहचान पर कविता Read More »

सफलता पर कविता

हिंदी कविता

सफलता पर कविता मन मे जोश उमंग भर लो,तुम्हे नया आकाश मिलेगा,आसमान को जरूर छू लो गे,रखो तुम मन मे विश्वास।ख्वाहिश को खामोश रखो,सफलता की ओर आगे बढ़ो,अहंकार कभी ना करना,मेहनत तुम करते जाओ।हार-जीत के बारे मे सोचो ना,कठिन राह से कभी डरो ना,सफलता प्राप्त करोगे तुम,कठिन राह से डरना नही।कड़ी चुनौती हर मोड़ पर,सामना

सफलता पर कविता Read More »

mahapurush

वीर जवान पर कविता

हिंदी कविता

वीर जवान पर कविता मान करे,सम्मान करे,वीर जवान का गुणगान करे,देश की सीमा मे रक्षा करते,हम सब मिलकर सम्मान करे। कश्मीर की सीमा मे तैनात है,हमारे वीर जवान,दुश्मनों की वार को,गोली से जवाब देते है। हिन्दू ,मुस्लिम,सिख,ईसाई,सभी है भाई-भाई,देश के जवान भाषा बोले,सीमा पर बंदूक की गोली से। पहरेदारी करते दिन-रात,सीमा पर खड़े वीर जवान,देश

वीर जवान पर कविता Read More »

निषादराज के दोहे

हिंदी कविता

*निषादराज के दोहे* (1) *दामिनी*देखा जबसे दामिनी,चकाचौंध अब नैन।होश हुआ मदहोश अब,ढलने को अब रैन।। (2) *व्योम*व्योम हुआ गहरा बहुत,बादल छाये आज।नहीं मिला अब चैन भी,नहीं हुआ कुछ काम।। (3) *पुलकित*माँ का आशीष है मिला,जीवन में उल्लास।पुलकित मेरा तन हुआ,हुआ मुझे विश्वास।। (4) *द्रवित*नैन द्रवित मेरा हुआ,खुशियाँ मिले हजार।मन मेरा शीतल हुआ, पा कर अपना

निषादराज के दोहे Read More »

लाजवाब जोड़ा कविता

हिंदी कविता

लाजवाब जोड़ा कविता-विनोद सिल्ला रहता हैहमारी लॉबी मेंचिड़ियों का जोड़ाइनमें है अत्यधिक स्नेहनहीं रहते पल भरएक-दूसरे से दूरनहीं है इनमेंसॉरी-धन्यवाद सीऔपचारिकताएंये बात-बात कोनहीं बनातेनाक का सवालरखते हैंएक-दूसरे का ख्यालनहीं उतारतेबाल की खालदोनों में सेकिसी के मुंहकभी नहीं सुनीससुराल की शिकायतमुझे लगायह जोड़ालाजवाब

लाजवाब जोड़ा कविता Read More »

बहादुरों पर कविता

हिंदी कविता

बहादुरों पर कविता (1)तिलक लगा ले माथे पर,शस्त्र उठा ले हाथों पर।वन्दे मातरम की गूंज से,निकल पड़े मैदानों पर।(2)योगेंद्र अनुज अमोल विजयंत,जाबाज सिपाही थे कारगिल पर।कर चड़ाई टाइगर हिल में,दिखा दी साहस अपने दम पर।(3)तोपे जब चली रण पर,गोले बरस रहे थे उन पर।कदम बढ़ रहे थे वीरों की,भारी पड़ रहे थे दुश्मनों पर।(4)रक्षा करते

बहादुरों पर कविता Read More »

आलसी पर कविता

हिंदी कविता

आलसी पर कविता मेरे अकेले में भी कोई आसपास होता है।तुम नहीं हो पर तुम्हारा आभास  होता है।1। बिखर ही जाता है चाहे कितना भी संवारोबस खेलते  रहो जीवन एक ताश होता है।2। जरूरतमंद तो आ ही जाते हैं बिना बुलाएआपकी जरूरत में आए वही ख़ास होता है।3। दिनभर भीड़ में शामिल होने के बाद रोजमन मेरा हर शाम  जाने क्यूँ उदास

आलसी पर कविता Read More »

बचपन के खिलौनों के बदलते ढंग कविता

हिंदी कविता

बचपन के खिलौनों के बदलते ढंग कविता जयतु, जय जवान, जय किसान हो,जयतु मातृ-भू, जय भारत महान हो। माटी की खुशबू ले चलो वहाँ-वहाँ,अपने देश के पहरेदार जहाँ-जहाँ। वतन में अंधेरा छाया है अब कहाँ ?रोशन करके गया वह सरहद यहाँ। नशे में डूब चूके हैं आज के जवान,कैसै सम्हलेगा देश, सब हैं नादान। है

बचपन के खिलौनों के बदलते ढंग कविता Read More »

कर्म पर दोहे -डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

कर्म पर दोहे -डॉ एन के सेठी भाग्य कर्म के बीच में , भाग्य बड़ा या कर्म।कर्म बनाता भाग्य को,यही मनुज का धर्म।। कर्म करे तो फल मिले,कर्म न निष्फल होय।कर्महीन जो ना करे ,जीवन का फल खोय।। कर्मगति है बड़ी गहन , इसे न समझे कोय।जो समझे सत्कर्म को, निष्कामी वह होय।। कर्म बिना

कर्म पर दोहे -डॉ एन के सेठी Read More »

Scroll to Top