January 2020

रोटी पर कविता

हिंदी कविता

रोटी पर कविता सांसरिक सत्य तोयह है किरोटी होती हैअनाज कीलेकिन भारत में रोटीनहीं होती अनाज कीयहाँ होती हैअगड़ों की रोटीपिछड़ों की रोटीअछूतों की रोटीफलां की रोटीफलां की रोटीऔर हांयहाँ परनहीं खाई जातीएक-दूसरे की रोटी -विनोद सिल्ला

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नमक पर व्यंग्य

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

नमक पर व्यंग्य होटल में खाने के मेज पर छोटे छोटे छिद्रों वाले डिब्बे पड़े ही रहते हैं।कार्टून बने डिब्बे में नमक मिर्च भरे होते हैं, दाल सब्जी में नमक कम हो तो मन मर्जी डाल लो।लेकिन सब्जी में नमक ज्यादा होने पर सारा जायका बिगड़ जाता है।नमक को सब्जी का जान कह सकते हैं,पानी

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निषादराज के दोहे

हिंदी कविता

निषादराज के दोहे (1) पाषाणमत बनना पाषाण तू,मन में रखना धीर।दया धर्म औ प्यार से,बोलो ज्यों हो खीर।। (2) क्षितिजदूर क्षितिज पर आसमां,नीला रंग निखार।जैसे श्यामल गात हो,सुन्दर कृष्ण मुरार।। (3) वत्सलमाँ का वत्सल है बड़ा,ममता का भण्डार।सारे जग में हैं नहीं,इनके जैसा प्यार।। (4) शुभ्रशुभ्र ज्योत्सना चाँदनी,धवल निखार प्रकाश।रजनी में प्यारा लगे,शीतलता आभास।। (5)

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बेबश नारी पर कविता- लाचार ममता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

बेबश नारी पर कविता सायं ठल गई अंधेरों में कब तक यूं ही सोओगे , ममता की दुलारी चिडियाँ कब तक यूं ही खोओगे। ममता का जमीर बेच दिया-इंसानियत के गद्दरो ने,बहना का सब धीर सेज दिया-चिडियाँ के हत्यारों ने।चोर,उच्चके चौराहों पर ध्यान लगाए बैठे है, इज्जत की पौडी पर अपना- ईम्मान लगाए बैठे है।

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जात-पात पर दोहे

हिंदी कविता

जात-पात पर दोहे जात-पात के रोग से, ग्रस्त है सारा देश|भेद-भाव ने है दला, यहाँ पर वर्ग विशेष|| जात-पात के जहर से, करके बंटा-धार|मरघट-पनघट अलग हैं, करते नहीं विचार|| जात-पात के भेद में, नित के नए प्रपंच|जात मुताबिक संगठन, जात मुताबिक मंच|| जात-पात है भयावह, जात भयानक रोग|करें नहीं उपचार क्यों, झेल रहे हैं लोग||

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आदमी का प्रतिरूप पर कविता

हिंदी कविता

आदमी का प्रतिरूप पर कविता-विनोद सिल्ला आदमीनहीं रहा आदमीहो गया यन्त्र सा जिसका नियन्त्रण हैकिसी न किसीनेता के हाथकिसी मठाधीश के हाथया फिर किसीधार्मिक संस्था के हाथजिसका आचरण है नियंत्रितउपरोक्त द्वाराआदमी होने काआभास सा होता हैबस आदमी काप्रतिरूप सा लगता है आज का आदमीनहीं रहाआदमी साजाने कहां खो गईआदमीयत

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mother their kids

मां की आंचल पर कविता

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। मां की आंचल पर कविता मां तुने अपने आंचल में सृष्टि को समेटा है,खुद दर्द सहके हमें जीवन दिया

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संभव क्यों नहीं कविता-विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

संभव क्यों नहीं कविता कामना हैन हो कोई सरहदन हो कोई बाधाभाषाओं कीविविधताओं कीजाति-पांतियों कीसभी दिलों में बहेएक-सी सरितासबके कानों में गूंजेएक-से तरानेसबके कदम उठेंऔर करें तयबीच के फांसलेयह सबनहीं है असंभवआदिकाल में थाऐसा हीफिर आज संभवक्यों नहीं

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एहसास कविता

हिंदी कविता

एहसास कविता जब मै तुमको देखा तोमन मे हलचल होने लगी ।दिल में एक अहसास हुआ,लगा की मुझे प्यार होने लगा । दिल धड़कने लगा जोर से,जब से तुमको मैने देखा है ।मेरे दिल को न जाने क्या हुआजब से तुमको मैने देखा है । नींद उड़ गई चैन खो गयादिल को क्या हो गया।मन

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सुंदरता पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

सुंदरता पर कविता *प्रकृति की सुंदरता को देखकर,**मेरा मन प्रसन्न हो गया,**प्रकृति की गोद मे अपनी सारी जिंदगी यही कही खो गया,**कभी सुखी धरा पर धूल उड़ती है,**तो कभी हरियाली की चादर ओढ़ लेती है,**प्रकृति की सुंदरता हो ना हो,**उसमे सादगी होना चाहिए,**प्रकृति मे खूशबू हो ना हो,**उसमे महक होना चाहिए,**प्रकृति मे हमेशा सुंदरता हो

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Courage

हौसले पर हिंदी कविता

हिंदी कविता

हौसला हर व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण है, खासकर जब हम परिस्थितियों के खिलाफ स्थिर रहने के लिए अपना विश्वास खो देते हैं। यह हमें हार नहीं मानने की शक्ति और उत्साह प्रदान करता है, और हमें अग्रसर करने के लिए पुनः प्रेरित करता है। हिंदी कविता : हौसलों की उड़ान हौसलों की उड़ान मत

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village based Poem

गांव पर दोहे

हिंदी कविता

गांव पर दोहे शहर नगर में विष घुले, करे जोर की शोर।शुद्ध हवा बहने लगी, चलो गांव की ओर।।१।। तेज गमन की होड़ में, उड़े बड़े ही धूल।मुक्त रहो इस खेल से, बात नही तुम भूल।।२।। शांत छांव में मन मिले, कष्ट मिटे अति दूर।हरा भरा तरु देखना, घूमें गांव जरूर।।३।। धान फसल की बालियां,

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