अब नहीं रुकूंगी पर कविता
हिंदी कविताअब नहीं रुकूंगी पर कविता अब नहीं रुकूंगी,नित आगे बढूंगीमैंने खोल दिए हैं ,पावों की अनचाहे बेड़ियां।जो मुझसे टकराए ,मैं धूल चटाऊंगीहाथों में डालूंगी ,उसके अब हथकड़ियां।।(१)अब धुल नहीं मैं ,ना चरणों की दासी।अब तो शूल बनूंगीअन्याय से डरूँगी नहीं जरा सी।क्रांति की ज्वाला हूँ मैं,समझ ना रंगीनी फुलझड़ियाँ ।।मैंने खोल दिए हैं ,पावों की […]
अब नहीं रुकूंगी पर कविता Read More »

