नानक पर कविता -अलामा मुहम्मद इकबाल
हिंदी कवितानानक पर कविता-अलामा मुहम्मद इकबाल कौम ने पैग़ामे गौतम की ज़रा परवाह न कीकदर पहचानी न अपने गौहरे यक दाना की आह ! बदकिसमत रहे आवाज़े हक से बेख़बरग़ाफ़िल अपने फल की शीरीनी से होता है शजर आशकार उसने कीया जो ज़िन्दगी का राज़ थाहिन्द को लेकिन ख़याली फ़लसफ़े पर नाज़ था शमएं-हक से जो […]
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